Month: September 2023

ना है पूजा ( कविता)

ना है पूजा सामान्यतः हम किसी भी धर्म की बात करें तो पाते हैं कि पूजा एक कर्मकांडीय प्रक्रिया है। जिसे जनमानस कभी मनवांछित वरदान की प्राप्ति के लिए तो…

बेटा और बेटी को समर्पित आज की कविता

आज कहने को तो समाज बहुत विकास कर लिया है। किंतु आज भी कुछ घरों में बेटे और बेटियों के परवरिश, सुख सुविधा, प्यार और ममता में धरती-आसमान का अंतर…

पन्द्रह मुक्तक

1- तुम सितम मुझ पर ढाते रहोगे, हम रिश्ते निभाते रहेंगे। पर अति ना कहीं तुम कर देना, हम तुम्हें छोड़ जाते रहेंगे। 2- रूप हो तेरो सुघर जस,नेक तजा…

कब बोलें? 24 सितंबर अंतर्राष्ट्रीय ब्रिटानी दिवस पर कविता

आज ‘ब्रितानी बेटी दिवस’ पर आज की मेरी कविता उन बेटियों को समर्पित जिन्हें संविधान द्वारा तथा समाज द्वारा मिले गया अधिकार सिर्फ़ किताबों के पन्नों में पढ़ने को मिलते…

फिर से सावन को आने दो (कविता)

पपीहा को टेर लगाने दो,बादल को जल बरसाने दो।फिर से धरती की प्यास बुझे,शिवमास को फिर से आने दो। फिर से सावन को आने दो,जीवन में रंगत लाने दो।इंद्रधनुष को…

भक्ति, करूण, वीर और श्रंगार रस में डूबी तीज की छ: कविताएँ

1-एक वीरवधू का फ़र्ज़ एक वीरवधू का जीवन जीना आसान नहीं होता।उसमें भी जब वह एक नवजात शिशु की मांँ हो। उसे कभी पाषाण की तरह कठोर ,तो कभी मक्खन…

सुहाग के पर्व तीज पर एक वीरवधू को समर्पित मेरी आज की कविता-एक अनोखी तीज

आज हमारा देश बहुत विकास कर लिया है। हम चांँद- तारों तक पहुंँच गए हैं, देखने में हम पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। किंतु, आज भी…