श्री राम और अयोध्या नगरी

1-दशरथ नंदन राज दुलारा

सारे जग का एक सहारा,
दशरथ नंदन राज दुलारा।
जिसका कोई ना रखवाला,
प्रभु नाम की जप लो माला।
प्रभु तुमको दे देंगे सहारा,
दशरथ नंदन राज दुलारा।
सारे—-

तन-मन धन से कर लो भक्ति,
दौड़े- दौड़े प्रभु आ जाएंँगे।
ना कोई तेरी लेंगे परीक्षा,
हर विपदा को भगा जाएंँगे।
लोभ, मोह को प्रभु ने मारा,
दशरथ नंदन राज दुलारा।
सारे—-

शबरी ने प्रभु को अपनाया,
जीवन अपना सफ़ल बनाया।
पाहन पर पग धरा प्रभु ने,
अहिल्या ने श्राप से मुक्ति पाया।
अजामिल को भी उद्धारा,
दशरथ नंदन राज दुलारा।
सारे—-

स्व-मन में विश्वास जगा लो,
ईर्ष्या- द्वेष को दूर भगा लो।
राम- लखन बन जाएँ माँझी ,
भर अमृत- बिष को दगा लो।
प्रभु भक्त खड़ा तेरे द्वारा,
दशरथ नंदन राज दुलारा।
सारे—-

2-अयोध्या नगरी

21वीं सदी बड़ी ही पावन,
लगे अयोध्या है मनभावन।

नारायण को यह अति प्रिय है,
मानो फैली यहांँ अमिय है।

यह है बड़ी ही पावन नगरी,
झूम रही है दुनिया सगरी।

प्रभु राम को भी अति प्यारी,
अवधपुरी है बड़ी दुलारी।

अवध का आंँगन बड़ा निराला,
पांँच जैन तीर्थंकर जन्मे हैं लाला।

बुद्ध अवधरज को किये प्यार,
सोलह वर्ष दिए यहांँ गुजार।

अयोध्या नगरी बड़ी पुनीत,
हिंदू ,जैन,बौद्ध की मीत।

हनुमानगढ़ी कुंड दंत धावन,
प्रभु राम को था मनभावन।

दातुन करते राम यहांँ पर,
बुद्ध भी दातुन करें वहांँ पर।

बौद्ध ग्रंथ की बात जो मानें,
अयोध्या को साकेत हम जानें।

अयोध्या नगरी स्वयं है आई,
इसको किसी ने नहीं बनाई।

शाश्वत तीर्थ हैं दो ही धरा पर,
जैन परंपरा कहे यहांँ पर।

जिसमें एक अयोध्या नगरी,
दूजा सम्मेद शिखर कहे जग री।

माधव के हैं रूप अनेक,
ऋषभदेव,राम,बुद्ध के भेष।

इक्ष्वाकु वंश के ये अवतार,
अयोध्या से जुड़ा इनका तार।

अंजनी वाटिका बड़ी ही शुद्ध,
बुद्ध सुनाए यहांँ अपने सूत्र।

पावस ऋतु जब आ जाती थी,
बुद्ध को अवध ही भा जाती थी।

अवध जैन धर्म को प्यारी,
ऐसे जैसे यह हो महतारी।

बड़ी ही पावन नगरी भैया,
ऐसे जैसे कामधेनु दुहैया।

अहो भाग्य जो यहांँ पे आए,
स्वर्ग का सुख उसको मिल जाए।

श्री राम और अयोध्या नगरी

साधना शाही, वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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