मानव दंभ ना कर कभी,
यह विनाश का मूल ।
यह है वृक्ष बबूल का,
ना विकसे हंसते फूल।

रावण घर जन्मे पूत लाख,
और सवा लाख जाए नाती।
अहंकार व आंधी का झोंका,
बुझा दिया सब बाती।

दंभ हो गया गांडीवधारी को,
वो हैं श्रेष्ठ धनुर्धर।
सब कुछ संभव कर सकते हैं,
वक्त लगे बस क्षन भर।

कपि सहयोग और पाहन से,
क्यों प्रभु ने सेतु बनाया?
अपने शर से पुल मैं बनाता,
यह दंभ उन्हें हो आया

दंभ के कारण,
रामसेतु पर प्रश्नचिह्न वो थे लगाए।
राम अनादर हनुमत वीरा,
बिल्कुल सह ना पाए।

हनुमत बोले सेतु बनाओ,
मेरा भार वो सह ले ।
तो मैं स्वयं कोअग्नि समर्पित कर दूं,
दुनिया जो चाहे वो कह ले।

क्षण में अर्जुन सेतु बनाए,
अंतर्मन में भर अहंकार।
हनुमत के पग धरते ही,
सेतु सह सका न उनका भार।

श्रेष्ठ धनुर्धर हो गए लज्जित,
अहंकार उनका गया टूट।
जग में जिसे भी दंभ हो आया,
पल में सारा गया वह छूट।

इसलिए मानव गांठ बांध लो,
कभी ना तुम करना अहंकार।
वरना तुम शर्मिंदा होगे,
छवि क्षण में होगी बेकार।

गरुड़, सत्यभामा ,सुदर्शन, आदि दिग्गज जब अहंकार से भर गए।
पल में पवन पुत्र से हारे,
भ्रम उनके सारे टर गए।

साधना शाही ,वाराणसी

Also Read – समय अनमोल खजाना

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *