कर्मवीर

कर्मवीर को हरा न सकता,
कोई आंधी और तूफ़ान।
देखो हम यह नहीं हैं कहते,
यह तो कहता सारा जहान।

सूझ-बूझ व मेहनत से ही ,
नृप करता है राज्य विस्तार।
तुम भी घुटने कभी ना टेकना,
पूर्ण करना है अभीष्ट तुम्हें यार।

निश -दिन श्रम और जिम्मेदारी ,
जीने के हैं सच्चे मंत्र।
इसी मंत्र के दम पर बेटा,
चलते सारे जग के तंत्र।

गिरि को काट जो मार्ग बना दे,
कर्मवान वो नर कहलाए।
महल अटारी वाले दब जाएं,
ये ही जग में मान बढ़ाएं।

समाचार पत्र कलाम जी बेचे,
बेच बने वो मिसाइल मैन।
विद्यार्थी दिवस रूप में मने जन्मदिन,
जीवन भर वो लिए न चैन।

अरुणिमा ने भी अंग था खोया,
साहस ना खोई वह वीर।
तभी तो एवरेस्ट फ़तह वो कर ली,
विघ्न बाधाओं को कर तीर।

तुम भी सब कुछ पा सकते हो,
अनवरत कर्म करो दिन- रात।
ऊंची ऊंची बात को छोड़ो,
हिम्मत को बस रख लो साथ।

साधना शाही ,वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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