कुछ लोगों के लिए
कुछ लोगों का
धन-संपत्ति अपना है
बस रिश्ता बेगाना है
यह कैसे हो सकता है?
और यदि है
तो
क्या यह ठीक है?

किंतु
जरा विचार कीजिए
जब रिश्ता हमारा नहीं है
तब उसी रिश्ते से जुड़ा
धन- वैभव
कैसे हमारा हो सकता है?
और यदि है
तो क्या यह ठीक है?

मान ,सम्मान यश, वैभव, धन- संपत्ति
सभी को
आपने इसलिए अपना लिया
क्योंकि यह
आपके अपने पुरखे
दादा-दादी, माता-पिता, ताऊ- ताई आदि से जुड़ा हुआ है
तो क्या
यह रिश्ते आप से नहीं जुड़े हुए हैं?
और यदि हैं
तो आपने
इन्हें कैसे तोड़ दिया?
और यदि आपने रिश्तो को तोड़ दिया
तो इनके धन -संपत्ति, सुख समृद्धि आदि को अपना लेना क्या यह ठीक है?

जब हम पैदा हुए
तब हमने इनको अपने आस-पास देखा,
महसूस किया,
प्यार पाए ,
खुशियां मिलीं ,
इन्होंने ही तो हमें दुनिया दिखाया
हमें जीना सिखाया
और हमने महसूस किया
कि
यह हमारे अपने हैं
इनके साथ हम सुरक्षित हैं
पर
यह क्या!
हम जैसे -जैसे बड़े होने लगे
हमारे अपने हमसे दूर
और उनका धन-संपत्ति
हमारे पास आने लगा
और इस तरह हम
कब अपनों से दूर
और भौतिकता के पास चले गए
यह पता ही नहीं चला
पता चला तो सिर्फ़
कुछ बूढ़ी आंखों और झुर्रियां पड़े चेहरे को
जो प्यार के दो बोल के लिए
सांसो के रहते हुए भी
बेजान हो गए
अब वो इस धरा पर
एक बिन बुलाए
मेहमान हो गए
जरा विचार करिए
क्या यह ठीक है?

आपके अंतरआत्मा से
एक ही आवाज आएगी
नहीं ,नहीं और नहीं
क्यों
आपने जो भी किया
सोच- समझ कर ही तो किया
बिना सोचे तो आपने कुछ किया नहीं होगा
फिर आपकी अपनी आत्मा
आपके कर्मों के साथ क्यों नहीं हो रही है
शायद इसलिए कि
आपने इसके पूर्व
अपने आत्मा की बात को
माना ही नहीं
उसकी आवाज़ को
सुना ही नहीं
आपका नकारात्मक मन
जो कहता गया
आप वही
करते गए,करते गए और करते ही चले गए
और
एक दिन
अपने ही लोगों से
इतने दूर चले गए
जहां से लौट कर आना
नामुमकिन ,नामुमकिन और नामुमकिन हो गया।
अब आप एक बार
फिर से विचार कीजिए
क्या यह ठीक है?

साधना शाही वाराणसी

Also Read – वास्तविक सुंदरता

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *