जिंदगी फूलों की सेज नहीं होती,
यह कब कहां जाएगी इसकी कोई रेंज नहीं होती।

इसे शूल के बागों से होकर गुजरना है,
फूलों की सेज की कोई दुकान नहीं होती।

कभी जेहन में तूफ़ान जो उठें तो, उसे दबाने की कला सीख लो,
क्योंकि मन -मस्तिष्क में जो उठते हैं तूफान, उनको दबाने की कोई खान नहीं होती।

दूसरों की राह पर अकर्मण्य चलते हैं,
कर्मवीर को दूजे की राह पर इत्मिनान नहीं होती।

ये जिंदगी है ग़ालिब इत्र सी खुशबू बिखेरेगी,
क्योंकि, मेहनतकश की राह कभी वीरान नहीं होती।

खुशियां तेरे कदम चूमेगी इसका रख भरोसा,
याद रख खुशियों की कोई परिधान नहीं होती।

कई बार कश्तियां साहिल पर डूब जाती हैं,
और कभी लहरों के बीच भी परेशान नहीं होती।

साधना शाही, वाराणसी

Also Read – मेरी लाडली

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *