देश समाज के तुम सूरज हो,
नील गगन के तारे हो।

जिन्हें देख मन प्रफुल्लित हो गया,
ऐसे छात्र हमारे हो ।

तुम्हें मुबारक परीक्षाफल हो,
मेहनत से जिसे पाया है।

पिछले पहर की लूटी दौलत,
आज बड़ा रंग लाया है ।

आंधी तूफान राह में आए,
उनसे ना घबराए तुम।

तभी तो मेरे प्यारे बच्चों !
ऐसे फल को पाए तुम।

अनवरत प्रगति राह पर चलना,
मार्ग में कभी ना थकना तुम।

विद्या- बुद्धि संग में बच्चों!
सत्कर्म ना तजना तुम।

जीवन का आधार है शिक्षा,
इससे सब कुछ पा सकते हो।

यह तुमको है सभ्य बनाती,
उन्नत समाज तुम ला सकते हो।

आज देश की मांग है शिक्षा,
विकसित देश का यह हथियार।

इससे ही वह ज्योति जलेगी,
वसुधा होगी एक परिवार।

साधना शाही ,वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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