वेद पुराण सभी माने हैं,
सावन मास महत्व।

भोले को नर -नारी पूजो ,
पाओ जीवन में सत्त्व।

सावन ,सोम महिमा अति भारी,
पर शनि को ना भूलो नर- नारी।

संपत शनिवार इसे हैं कहते,
शनिदेव हैं पूजे जाते।

कुप्रभाव है शनि का कटता,
जनमानस ना कहीं भटकता।

शिव शिष्य धर्मशास्त्र इन्हें कहता,
परम भक्त भी माना जाता।

सावन शनि को पूज लो प्यारे,
शिव और शनि कर देंगे वारे न्यारे।

दोनों का आशीष मिलेगा,
बिन मांगे हर चीज़ मिलेगा।

शनि कोप से बच जाओगे,
हनुमत कृपा भी तुम पाओगे।

शनि शांत जब हो जाएंगे,
आरोग्य ,धन -संपति वर्षाएंगे।

लौह कटोरी कड़वा तेल,
मध्यमा उंगली से हो मेल।

सनी का जाप करो चित्त लाकर
दीन- दुखी को तेल दानकर।

रुका हुआ धन आ जाएगा,
बिगड़ा काज संवर जाएगा।

सरसों तेल शिवलिंग पर चढ़ाओ,
तेल से ही अभिषेक कराओ।

नीम की लकड़ी हवन करो तुम,
काले तिल की आहुति डालो।

घर -परिवार सभी खुश होंगे,
दुष्प्रभाव से शनि मुक्ति देंगे।

दुख -बाधा सब दूर करेंगे,
सावन शनि सुख -समृद्धि देंगे।

साधना शाही, वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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