दैत्य संहारक मां चामुंडा

हिंदुओं के लिए अश्विन माह भगवदराधन, ईश्वर में तन्मयता का माह है और इसमें शारदीय नवरात्र का सर्वाधिक महत्व है। नवरात्रि के पावन बेला और ईश्वर भक्ति की श्रृंखला में आज मैं आप लोगों को शुंभ-निशुंभ, सुग्रीव धुम्राक्ष का मर्दन करने वाली माता चंडिका के बारे में काव्य शैली में बताने का प्रयास कर रही हूं और उम्मीद करती हूं कि आपको मेरा लेख पसंद आएगा-

शुंभ- निशुंभ संहारक देवी,
स्थिति उसकी की विदारक देवी।

इनके नाम को जप लो प्यारे,
तज के व्याधियां कर लो न्यारे।

शुंभ निशुंभ दो दैत्य ऊपज कर,
उथल पुथल चहुं ओर मचाए।

त्राहि-त्राहि पूरा जग बोला,
इंद्र सिंहासन भी था डोला।

उनकी शक्ति का ना कोई सानी,
वसुधा पर वो करें मनमानी।

धरा ,पाताल नृप हुए पराजित,
काले मेघ से विश्व आच्छादित।

अब वो स्वर्ग पर किया चढ़ाई,
देवों की बढ़ गई अकुलाई।

देव जनार्दन लगे सुमिरने,
प्रतीक ज्योति देखा सभी ने।

माधव गात से ये थी निकली,
इत-उत छाई खुशी की बदली।

ज्योति चामुंडा रूप की धारण,
दुख -संताप का की निस्तारण।

रूप अलौकिक उसने पाया,
मंत्रमुग्ध सारा जग हो आया।

शुंभ- निशुंभ आसक्त हो गए,
दूत सुग्रीव थे भक्त हो गए।

ब्याह संदेशा सुग्रीव लाया,
मां की महिमा जान न पाया।

करने लगा वो दंभ की बातें,
किसी एक को वर लो माते।

वापस भेजा मा ने दूत,
पहले मुझसे कर लो युद्ध।

युद्ध करो और करो परास्त,
फिर तुम मांगो तुम मेरा हाथ।

धूम्राक्ष आया सीना ताने,
स्वर्ग उसे था भेजा मां ने।

चंड मुंड बढ़-चढ़कर आए,
पौरूष अपना मां को दिखाएं।

प्राण पखेरू इनके उड़ गए,
मां के खड्ग से मस्तक कट गए।

रक्तबीज फिर किया हुंकार,
करने लगा वार पर वार।

धरा पर रक्त की बूंद जो गिरती,
दैत्यों में परिवर्तित होती।

रक्त पान देवी कर डालीं,
करुणा मेघ को वो बरसा लीं।

रक्तबीज का भी अंत हो गया,
खुशियां फैलीं आतंक शांत भया।

अंत में शुंभ -निशुंभ भी आए,
अपनी शक्ति थे अजमाए।

मां ने ऐसा किया प्रहार,
बन गई गति गए स्वर्ग सिधार।

मां की ज्योत चहुंओर जग गई,
देव थे हर्षित व्याधियां भग गई।

मां तू दीन दयालु बड़ी है,
जग हित हर विपदा से लड़ी है।

पाप धरा पर जब भी फैला,
मां के खड्ग ने धो दिया मैला।

तेरी भक्ति से मुक्ति मिलेगी,
उलझी हर गुत्थी सुलझेगी।

भक्त करो मां का जयकारा,
मां चामुंडा जग है पुकारा।

साधना शाही ,वाराणसी

प्रिय पाठकों ,
आशा है सभी भगवत प्रेमियों, श्रद्धालुओं को मां के विभिन्न रूपों का काव्य शैली में वर्णन पसंद आएगा। लेखन को उत्तरोत्तर परिमार्जित करने के लिएआपका सुझाव व टिप्पणी सदा शिरोधार्य है।🙏🙏🙏🙏🙏

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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