नवरात्रि का प्रथम है वार,
घट स्थापना करें भक्त परिवार।
अखंड ज्योति घर-घर में जलती ,
नवो दिन धूमधाम है मनती।
मां के नौ रूप पूजे जग संसार,
मां की महिमा अपरंपार।

प्रथम दिवस शैलपुत्री जी आईं ,
पर्वतराज हिमालय घर जाईं।
जो भक्त पूजन इनका करता,
मनोकामना पूर्ण है होता।
धन -धान्य भरती मां घर -द्वार ,
मां की महिमा अपरंपार।

पर्वतराज के घर में जन्मी,
शैलपुत्री है नाम पड़ा।
शैल से इनका जन्म हुआ है,
इनकी पूजा जो जन करता जीवन में स्थिरता पाता।
दुख दरिद्रता ये हर लेती ,देती सुख भरा संसार ,
मां की महिमा अपरंपार।

वृषभ आरूढ़ ये देवी आतीं,
उमा नाम से जानी जातीं।
हेमवती उपनिषद हैं कहते,
शक्ति अनंत हैं इसमें बसते। ।
चंवर डोलाऊं मां के द्वार,
मां की महिमा अपरंपार।

दाएं हाथ में त्रिशूल विराजे,
बाएं हाथ कमल- पुष्प साजे।
नवदुर्गा में प्रथम यह दुर्गा,
स्थित चक्र मूलाधार,
रोली; मोली ;मेहंदी लाल ,
मां की महिमा अपरंपार।

चलो मैया के दरबार चले हम,
मां के आगे नतमस्तक हों।
सेवा करले हम दिन -रात, ।
कृपा की कर दे मां बरसात।
प्रेम से कर लो भक्तों जय -जयकार ,
मां की महिमा अपरंपार।

साधना शाही वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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