बदल दो हीन मानसिकता अपनी,
समाज में परिवर्तन ले आओ
बेटियां विश्व फतह कर रही है,
उनका हौसला तो बढ़ाओ।

जो कल तक बेटी जन्म लेने पर,
सर झुका के कहते थे।
UPSE का रिजल्ट देख कर,
अपना मान बढ़ाओ।

ये घर -आंगन की नन्हीं कलियां हैं,
कल फूल बन महकेंगी।
आपके वीरान घर- आंगन को,
अपनी कामयाबी से भर देंगी।

ये ही भविष्य नारियां हैं,
जग निर्माण करती हैं।
कुछ कुरीतियों के समर्थक फिर भी,
इनके जन्म पर त्राण करते हैं।

ये नन्हीं परियां है ,
इन्हें खुले आसमान में उड़ने दो।
जग का तमस मिटायेंगी,
इन्हें परचम तो लहराने दो।

तुम मत इन्हें कोख में मारो,
इन्हें तुम जन्म लेने दो।
अस्तित्व संकट में ना डालो,
इन्हें तुम कर्म करने दो।

इनमें छिपी कल्पना, अरुणिमा,
इन्हीं में आरती, होलकर।
ये हर सपना पूर्ण कर देंगी,
इन्हें नव निर्माण करने दो।

बेटी भी जीना चाहती है,
कुछ कर दिखलाना चाहती है।
तुम्हारे दिल की बगिया में,
अपने लिए छोटा सा आशियाना चाहती है।

कभी उसको भी इठलाने दो,
ख्वाबों ख्यालों में खोने दो।
जीवन के इंद्रधनुषी रंगों को,
अपने जीवन में भरने दो।

उसके प्रति फ़र्ज़ को समझो,
संवेदनाएं खुद जग जाएंगी
जमाने के हर पत्थर का,
जवाब वो हंस दे पाएंगी।

बस उनको बोझ ना समझो,
उन्हें सौभाग्य समझो तुम।
जिनके घर वो ना जन्मी,
उनका दुर्भाग्य समझे तुम।

साधना शाही, वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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