परिवर्तित हो शिक्षा की पद्धति ,
दूर हो देश से पिछड़ापन।
सृजनशील शिक्षा को बना लो,
तन -मन से तुम करो विवेचन।

अंधविश्वास की जड़ें मिटेंगी,
आधुनिक शिक्षा आएगी।
जनमानस सब हर्षित होंगे,
समृद्धि ,समुन्नति छाएगी।

किंतु ढाक के तीन पात रहे,
ना कुछ भी तब्दील हुआ।
समझ सके ना रासायनिक प्रतिक्रिया,
रटंत शिक्षा बस फील हुआ।

खोजपरक शिक्षा को कर दो,
जोड़ों व्यवहारिकता से इसे।
इससे परिचित होकर बच्चे,
इसे वर्तमान से जोड़ेंगे।

तार्किकता को जागृत करके,
कौशल का निर्माण करेंगे।
विज्ञान शिक्षण यदि हो सकारात्मक,
देश- समाज का त्राण करेंगे।

यद्यपि बहुत कुछ बदल गया है,
बहुत बदलना बाकी है।
पोखर तालों में तैरने वालों को,
सागर की करना तैराकी है।

साक्षात इंद्रिय बोध कमी है,
संवेदनशीलता शून्य हुई।
इसीलिए तो सुन लो यारों,
शिक्षा पद्धति दयनीय हुई।

केंद्र में छात्र को रख दो शिक्षण,
विभव देख लो फिर इसका।
उन्नत शिक्षा उन्नत छात्र हों,
बदलेगा तस्वीर इसका।

उन्नत छात्र सृजनकर्ता हो,
विकासशील बन जाएंगे।
दुख दरिद्र का नाश करेंगे
घर-घर खुशियां लाएंगे।

साधना शाही, वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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