हमारे देश में बेटियों को देवी की तरह पूजा जाता है। नवरात्रि में 9 दिन हम लोग देवी को पूजते हैं ,कन्या भोजन कराते हैं ,और दसवें दिन मां की विदाई कर देते हैं। इसी प्रकार जब हमारे घर में बेटी भी जन्म लेती है तो उसे 20 ,25 साल बड़े ही प्यार से अरमानों से उसका पालन- पोषण करते हैं । लेकिन उसे यह आभास हमेशा कराते रहते हैं कि तुम पराई हो, तुम इस घर की नहीं हो ,तुम्हें ब्याह कर दूसरे घर जाना है।
और फिर वह घड़ी भी आ जाती है जब हम उसे अपने जीवन भर की संचित पूंजी व आशीर्वाद लादकर दूसरे घर भेज देते हैं ।जब वह वहां जाती है तो उसे वहां भी यही आभास कराया जाता है कि तुम यहां पर काम करो खाओ पीयो रहो लेकिन इसे अपना घर समझने की भूल मत करना। क्योंकि तुम पराए घर से आई हो , पराई हो और पराए घर से आकर इस घर पर अधिकार करने की भूल कदापि नहीं करना ।तो आज की मेरी कविता इन्हीं भावों से ओतप्रोत है-

बेटी का कोई घर नहीं

बेघर बेटी पैदा होती ,
बेघर दुनिया जाती छोड़।
कोई घर ना है बेटी का,
परायापन जताने में लगी है होड़ ।

बेटे का है बाग बगीचा,
बेटे का घर द्वार है।
बेटे का सब कपड़ा गहना,
बेटी क्या बेकार है?

पैदा हुई बाबुल ने बताया,
तू तो पराया धन है बेटी।
प्यार से हाथ फेर मां बोली,
इक दिन उठेगी तेरी डोली।

बात- बात में भाई झगड़े ,
बोले जाने कब जाएगी।
एक बार तू जा के देख ले,
तेरी याद नहीं आएगी।

लता सी लिपटी बहना बोली,
लडूं – झगडूंगीअब मैं किससे।
चोरी करके छीन झपट के,
अब मैं चीजें लूंगी किससे।

आस पड़ोस की अम्मा ,दादी,
बेटी तो चिड़िया होती है।
पालन- पोषण हम हैं करते,
दूजे घर की तू होती है।

बीता समय बेटी हुई सयानी,
करो पराया सबने ठानी।
दान दहेज से लद गई बेटी,
फिर अपनों से तज गई बेटी।

अब पहुंची वो दूजे घर में,
उसका जीवन था वर कर में।
सब की मान- मर्यादा रखना,
अपने घर सा इसे समझना।

फिर आई सासू मां की बारी,
वह भी तो हैं इक महतारी।
आकर मुझको वो समझाईं,
दूजे घर की तू है पराई।

काम-काज सब ध्यान से करना,
सबकी सुनना कुछ ना बोलना।
बहू के हैं ये ही संस्कार।
ये ही तेरे जीवन के आधार।

दिन भर बेटी काम करे है,
नहीं कभी आराम करें है।।
उसके जज़्बातों का फिर भी,
ना कोई भी मोल करे है।

हाय विधाता ! कैसी ये रीत है,
मां के देश में बेटी से कैसी ये प्रीत है।
दो घर उसके जन्मी ब्याही,
पर दोनों में ही वो पराई।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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