बेटी दिवस पर कविता

सितंबर माह के चौथे रविवार को राष्ट्रीय बेटी दिवस पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है ।इस बार यह दिवस 25 सितंबर रविवार को मनाया जाएगा । उसी उपलक्ष में ,मैं बेटियों से जुड़े अपने मन के भावों को कविता के रूप में व्यक्त करने का एक छोटा सा प्रयास कर रही हूं ,उम्मीद करती हूं आपको मेरा प्रयास पसंद आएगा।

बिटिया ब्याह के पी घर आई,
आंखों में ले सपनों का ढेर ।

आंखों में सतरंगी सपने,
पूर्ण हो जल्दी ना हो देर।

एक वर्ष अब बीत चला है,
गर्भ धारण का रीत चला है।

मातृत्व सुख अब मुझे मिला मिलेगा,
इसमें जीवन का संगीत घुला है।

मुस्कुराकर वह पी से बोली,
होगा लड़का या फिर डॉली।

जो भी हो सहर्ष स्वीकार्य है,
दोनों ही होंगे हमजोली।

जो भी होगा होने दो मुझे नहीं है चिंता,
लल्ला पढ़ लिख नाम करेगा बनेगा वो अभियंता।

दसों दिशाएं हर्षित होंगी,
उनमें विजय का बजेगा डंका।

भार्याऔर बेटी हुई तो?

जीते जी हम तर जाएंगे,
बिगड़े भाग्य संवर जाएंगे।

मैं क्या उसको खाक सिखाऊं,
सब अवगुण उससे डर जाएंगे।

मैं ना उसका बाप रहूंगा,
वह होगी मेरी छोटी मम्मी।

मैं उसका हीरो होऊंगा,
वो होगी मेरी अद्भुत चम्मी।

साल बरस यूं ही बीतेंगे,
पर वो होगी प्यारी लल्ली ।

वो घर में सुख समृद्धि लाएगी,
फट जाएगी दुख की बदली।

अर्धांगिनीक्या यह सब कुछ हमारा लाल नहीं कर सकेगा?

क्यों नहीं भला करेगा बेटा,
वह भी प्यारा बेटी जैसा।

सीखके वो सब काम करेगा,
वो भी जग में नाम करेगा।

पर बेटी सा ना वो होगा ,
जो कह दो वो काम करेगा।

मन के भाव जो झटपट पढ़ ले ,
इसमें पारंगत होती लाडली।

ना उससे कुछ कहना पड़ता,
स्वयं समझ जाती वह पगली।

ऐ मेरे मालिक!ऐ मेरे मौला!
उस बिन जीवन था मेरा सूना।

मेरे घर में परी क्या आई,
खुशियां लाई दूना -चौगुना।

साधना शाही ,वाराणसी

मैं अपने उन सभी पाठकों को धन्यवाद देती हूं जिन्होंने मेरे लेख को सराहा और पसंद किया। मेरे लखन को और भी परिमार्जित करने के लिए आप की ओर से जो भी सुझाव प्राप्त होंगे मैं उन सभी को सहर्ष स्वीकार करूंगी। 🙏🙏

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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