मीत मेरे !मीत मेरे !
जीवन के संगीत मेरे !
सोच मेरी कुछ थी ऐसी
मीत मेरा साथ होगा
चाहे सुख हो, चाहे दुख हो
संग सदा यह एहसास होगा
उस हाथ में मेरा हाथ होगा
वटवृक्ष सा छाया बनेगा
जब हृदय मेरा दग्ध होगा
कष्ट से संतप्त होगा
पग बढ़ाकर मीत मेरा
हाथ मेरा थाम लेगा
वह सदा मेरा नाम लेगा।

जीवन के पथ पर जब कभी
असहाय सा महसूस होगा
जिस्म के संग रूह थकेगी
मन में भरा अवसाद होगा
वही जो मेरा हमसफ़र है
बांह मेरी थाम लेगा
वो सदा संग में रहेगा
चाहे ना कोई नाम लेगा।

हिय जब बंजर सा लगेगा
चहुं ओर से खंजर लगेगा
पतझड़ों का दौर होगा
ना कहीं जब ठौर होगा
वह ठिठोली कर हृदय को
नेह से सिंचित करेगा
हिय जो बंजर हो चला है
उसको वो उर्वर करेगा
खंजरो का दौर जो है
खुशियों का मंजर करेगा
कहकहों की करके खेती
जीवन को उर्वर करेगा।

क्यों सोच के विपरीत सब कुछ
गल्फतो में मैं थी उलझी
राह सारे बंद थे अब
स्वपन सारे धुंधले- धुंधले
मन सदा बस यह ही कहता
सोच क्यों झूठी हुई है
हे विधाता !न्याय कर तू
मुझसे ना अन्याय कर तू
मीत को मनमीत कर दे
जीवन में संगीत भर दे
ख्वाब मेरे एक कर दे
एक ना प्रत्येक कर दे।

विभव सब कुछ है भरा जब
मन पराभव से भरा क्यों?
जी लिए औरों की खातिर
अपनों से अब नेह कर ले
शुष्क सा हिय हो चला है
आद्रता को खो चला है
मेह बन इसे आद्र कर दे
नेह से सौहाद्र कर दे
फिर सदा जीवन हमारा
सुकून का भंडार होगा
खुशियां अपरंपार होगा
कहकहों के पुष्प होंगे
आनंद के फल लगेंगे
सोच मेरी सत्य होगी
हयात जन्नत सी लगेगी
जीवन मधुर संगीत होगी
मीत मेरे !मीत मेरे!
जीवन के संगीत मेरे।

साधना शाही वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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