मै तुझे बस इक टक देखूं पलक न झपकुं पलभर भी,

 तू कस्तूरी सी मुझ मृग में हो ढूंढ न पाऊं चलकर भी..

तू बूंद बूंद ओस हो जैसे तू पलक पलक ठहरी है ऐसे,

 तू ख्वाबों में तू चित में है तू दूर नहीं है पलभर भी……

तू शब्दो में तू लफ्ज़ों में तू बहती फिज़ा में नब्जो में,

तू मेरा जिस्म है तो दीवाना हूं दीवाना रहूंगा जलकर भी..

तू मधुशाला तू मयखाना मै होश वाला तेरा दीवाना,

सब चांद तुझे ही समझते हैं चांद ने देखा है ढलकर भी..

खुले मयखाने है निगाहें तेरी इन्हीं से होकर है राहें मेरी,

 इनमें कोई संभले तो संभल जाए मै क्या करूंगा संभलकर भी.

तू इश्क इश्क मै मुश्क मुश्क दोनों महकेंगे जलकर भी,

मैने इश्क को कहा मोहब्बत भी जज़्बात न बदले बदलकर भी.

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