नित्य प्रति उठकर शीश झुकाओ, वृक्षों का करलो सम्मान ।
वृक्ष लगाओ करो प्रयोजन,
प्रकृति संतुलन का रखो ध्यान।

यह सभ्यता के उदय स्रोत हैं,
आश्रय के भी ये साधन।
माता सा ये लाड़ लुटाते ,
करो सदा इनका अभिवादन।

जब तक ये हैं साथ तुम्हारे,
दुख संताप से दूर रहोगे दूर।
फल- फूल और सारी खुशियां,
सब कुछ पाओगे भरपूर।

वृक्षारोपण पुण्य कर्म है,
शास्त्रों ने भी माना है ।
जब तक हो एक भी धड़कन,
इनको हमें बचाना है।

आज का मानव बड़ा स्वार्थी,
सीना इनका छलनी किया।
इसने दिया धन-धान्य और,
हमने इन पर वार किया।

जन्मदिवस को तुम उठ प्यारे,
वृक्ष यदि एक लगाते हो।
वृक्षारोपण के अभियान को,
सफल बना ले जाते हो।

बहुत सो लिए अब तो जागो,
खुद से यह संकल्प करो ।
वृक्ष को पूजो, वृक्ष को चाहो,
इनका मर्दन अल्प करो।

साधना शाही वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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