शिवनेरी में बजी बधाई,
छत्रपति शिवाजी जाए ।
19 फरवरी 1630 अघाती,
यह दिन मराठों को आति भाए।

जीजाबाई की कोख धन्य हुई,
पिता शाह जी थे हर्षाते।
पूरा महाराष्ट्र गर्व जिन पर करता,
उनके ये हैं पिता कहलाते ।

मुगल सामंत बन राज चलाते,
भारत में चीख-पुकार मची।
बाल्यकाल से मुगल विरोधी,
हिंदू क्षत्रिय वीर शिवाजी।

नाम से जिसके मुगल थर्राए,
शिवाजी वो नाम कहाए।
आदिल शाह, निजाम शाह के छूटे पसीने,
करतब जब शिवाजी दिखलाए।

हौसला व बुद्धि का मेल हुआ जब
मुगल थे घुटने टेक दिए,
6 जून 1674 को मराठे,
रायगढ़ में राज्याभिषेक किए।

नीलगगन भगवा फहराए,
दुश्मन कानन में छिप जाए।
इनके यश का वर्णन करने में,
कलम स्वयं को अक्षम पाए।

सब धर्म का सम्मान थे करते,
भारत पर अभिमान थे करते।
पर दुश्मन जो आंख दिखाएं,
पल में वारे न्यारे करते।

छापामार युद्ध में दक्ष थे,
नौसेना के जनक कहाए।
कार्तलब खान, इनायत खान के
दांत कर खट्टे,
रणभूमि में धूल चटाए।

रायगढ़ मराठों की राजधानी थी,
धने पहाड़ों के थी बीच ।
रायरी नाम इसका था पुराना,
बदल रायगढ़ किए शिवाजी वीर।

1674 में छत्रपति कहाए,
1680 में जान गंवाए ।
हनुमान जयंती में लगी थी जनता,
तभी शिवाजी प्राण गंवाए।

भारत की रक्षा खातिर,
सर्वस्व निछावर किया यह शेर।
राज्याभिषेक के पावन तिथि पर ,
नतमस्तक हो देश किये बिन देर।

साधना शाही ,वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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