समंदर होना चाहिए

जिंदगी नदी नाला नहीं,
समंदर होना चाहिए ।
बाहर में कहकहे रहें ,
भले रूदित अंतर होना चाहिए।

यह दुनिया है गालिब,
दर्द को दर्द देती है।
व्यथित और व्यवहरित में,
बस अंतर होना चाहिए।

फूलों की चाह जीवन में मत रखो प्यारे,
फूलों के संग सदा शूल भी मिलेंगे ।
फूल- शूल दोनों के संग खुश रहकर,
दोनों को चुनने का बस मंतर होना चाहिए।

जिंदगी नदी नाला नहीं ,
समंदर होना चाहिए।
बाहर में कहकहे रहें ,
भले रूदित अंतर होना चाहिए।

हौसला पस्त करने को बेगाने नहीं,
अपने ही आएंगे।
उन अपनों को पस्त करने का,
करैक्टर होना चाहिए।

पस्त करने वाले को तुम पस्त करो,
आने वाला डर के अपने आप चला जाएगा।
याद बस यह रखना है कि
उसके जाने से तुम्हारे हीय बीच,
एक बवंडर होना चाहिए।

जिंदगी नदी नाला नहीं ,
समंदर होना चाहिए।
बाहर में कहकहे रहें,
भले रुदित अंतर होना चाहिए।

ऐ खुदा के बंदे !
आंधी तूफान का दौर चलेगा।
दौरे जहां को रौंदने का,
खंजर होना चाहिए।

रौंद न पाया यदि ,
रौंदा जाएगा जहां से।
फिर नया जज्बा व जोश,
हर बंदे के अंदर होना चाहिए

जिंदगी नदी नहीं,
समंदर होना चाहिए।
बाहर में कहकहे रहें,
भले रूदित अंतर होना चाहिए।

घात -प्रतिघात जो भी मिले,
खंजर ही देता है।
दोनों से उबरने का ,
कुछ मंजर होना चाहिए।

ज़रूरत है ,
शम्मा ए दिल को जलाए रखने की।
शर्त यह है कि एक ही शम्मा से ,
घर रोशन होना चाहिए ।

जिंदगी नदी नाला नहीं ,
समंदर होना चाहिए।
बाहर में कहकहे रहें,
भले रुदित अंतर होना चाहिए।

जलते शमा को बुझाने,
आंधियों का दौर आएगा।
वह एक दो जगह नहीं ,
हर ठौर आएगा।

हर दौरे जहां को रौंदने का,
हुनर होना चाहिए ।
दिलों में जो छाया अंधेरा घना है,
उसे पूनम में बदलने को सदा तत्पर रहना चाहिए ।

जिंदगी नदी नाला नहीं,
समंदर होना चाहिए।
बाहर सदा कहकहे हों,
भले रूदित अंतर होना चाहिए।

साधना शाही ,वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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