समय बनाए राजा हमको,
समय बनाए रंक।
समय आज उसका अनुगामी,
कल जो बना था बंक।

यह तो है अनमोल खजाना,
रख तू इसे सहेज।
समय पर कर्मों को करने से
ना कर तू परहेज़।

क्या करना है अभी तू तय कर,
समय न कर दे यह काज,
समय यदि तय कर देगा तो,
सब कुछ होगा बर्बाद।

नियति भी कार्य समय पर करती,
तभी नतमस्तक हैं लोग।
रवि -शशि समय पर विचरण करते,
ना कोई करते ढोंग।

समय गंवाना कार्य मूर्खता,
कल का ना कोई ठौर।
यही है जग में उपहास कराता,
यही बनाए सिरमौर।

समय के साथ जो चल लेता है ,
होता वह कामयाब।
जग में ना वो पछताता है,
रीत बड़ी यह नायाब।

साधना शाही,वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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