नवरात्रि का नवां दिन आज है,
मां सिद्धिदात्री की कृपा साथ है।

मां भक्ति से कटे दुख- संताप ,
क्षण में मिट जाते सब पाप ।

नश्वर संसार से विरक्ति हो जाती,
जिसको मिल जाती मां नाम की थाती।

मां की भक्ति जीवन आधार
इससे होते भवसागर पार ।

श्रद्धा -भक्ति से मां को पूज लो,
सभी सिद्धियां अर्जित कर लो।

मोक्ष के द्वार सभी खुल जाते,
जीवन परिमार्जित कर जाते।

कमलासन पर माता विराजें,
खुशियों का आच्छादन साजें।

मां हैं सिंह सवारी करतीं,
चार भुजाएं धारण करतीं।

शिव को सिद्धि मां ने दिया था,
अर्धनारीश्वर गात हुआ था।

केतु ग्रह की ये हैं नियंता,
पूजो इन को छू नहीं सकता।

मां की पूजा अति कल्याणकारी,
पूज लो इनको हर नर नारी।

ये देवी ही सर्वमय हैं ,
इनके भक्तों को ना कोई भय है।

साधना शाही, वाराणसी

प्रिय पाठकों,
शारदीय नवरात्रि के नवो दिन में मैंने माता के भिन्न-भिन्न रूपों का काव्य शैली में वर्णन करने का प्रयास किया । उम्मीद करती हूं मेरा यह प्रयास आपको पसंद आया होगा। मेरे प्रयास को और भी परिमार्जित करने तथा मेरे उत्साहवर्धन हेतु मेरी कविताओं को शेयर करें, तथा अपने सुझाव एवं टिप्पणियों से सदा मुझे लाभान्वित करें ,ताकि मैं अपने लेख को और भी परिमार्जित कर सकूं।
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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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