ग्रंथ हमारे हैं मार्गदर्शक,
इस सम कोई गुरु नहीं,

ज्ञान की राह सदा दिखलाते,
इन बिन कोई सद्गुण नहीं।

सुख समृद्धि के पीछे भागे,
ग्रंथ मोल ना समझे प्राणी।

ईश्वर अल्लाह यीशु वाहेगुरु,
इनमें है जानकारी सारी।

अमूल्य निधि ये मानव मात्र के,
ये हैं अमर और ये शाश्वत।

ईश्वर की वाणी है इसमें ,
जो मानव को कभी करे न
आहत।

गीता, गुरुग्रंथ ,बाइबिल है समाया
कलमषता को दूर भगाया।

घोर निराशा ये हर लेता,
आशा के बीजों को बोता।

इन ग्रंथों का आदर कर लो,
उपजे मन में दृढ़ता श्रद्धा।

सत्य की पुष्टि गीता करता,
संस्कारों को नस-नस भरता।

इनका आदर कर लो मानव,
जो न करे कहलाए दानव।

आधुनिकता की चरम हो जाए ,
ग्रंथ के आगे सब हैं गौण।

युवक-युवतियों इसको पढ़ लो ,
पढ़ लो वृद्ध व पढ़ लो प्रौढ़।

नित दिन इसका पाठ करो जो,
भविष्य उज्जवल हो जाएगा।

वैमनस्यता को नाश करेगा,
सौहार्द को यह बढ़ाएगा।

साधना शाही वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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