होली छः दिन का त्योहार,
खुशियां लाए अपरंपार।

जले होलिका हो प्रारंभ
रंग पंचमी पर हो अंत।

होलाका आरंभिक नाम,
दक्षिण पूर्वी भारत था धाम।

चंदामामा पूजे जाते थे,
सुख -समृद्धि वो साथ में लाते थे।

वैदिक काल की महिमा भारी,
नवत्रेष्टि यज्ञ करे पुजारी।

हर्षोल्लास बिखर जाता है,
वसंतोत्सव जब आता है।

मथुरा का वृंदावन बिहसा,
आयोजित जब फोड़ो मटका।

भार भोलिए जलाया जाता,
उपले का ही यह एक भ्राता।

बड़कुल्ले दूजा है नाम,
गाय का गोबर आता काम।

घर का अनिष्ट उतर है जाता,
होलिका में जब यह जल जाता ।

बरसाने की अद्भुत होली,
लठमार पर प्रेम भिगोली।

नंदगांव से पुरुष हैं आते,
बरसाने की युवती होती।

मस्ती में नंदगांव जब डूबे,
बरसाने की लाठी झूमे

हुर्रिया उफ़ ना कभी हैं करते,
लठ के वार को हंस के सहते।

साधना शाही वाराणसी

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Image Reference –https://news.unl.edu/newsrooms/today/article/color-throws-holi-celebration-april-8/

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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