अंतरराष्ट्रीय नृत्यInternational Dance Day

नमस्कार मित्रों अपने इस लेख में मैं आपको नृत्य क्या है? भारतीय नृत्य शैली, पाश्चात्य नृत्य शैली, अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस का परिचय , अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस का उद्देश्य आदि बातों का बातों से अवगत कराने का प्रयास की हूं।

नृत्य क्या है?

नृत्य मानवीय अभिव्यक्तियों का एक रहस्यमय प्रदर्शन है। यह एक सार्वभौम कला है जिसका जन्म मानव जीवन के साथ ही हुआ है। बालक जब पैदा होता है तो वह अपना हाथ पैर मार कर अपने भावनाओं की अभिव्यक्ति करता है इस प्रकार सामान्यतः यह माना जाता है कि उसके अंग प्रत्यंग की क्रियाओं से ही नृत्य की उत्पत्ति हुई ।यह देवी-देवताओं ,दैत्यों- दानवों, मनुष्यों , पशु -पक्षियों एवं वृक्षों सभी को अत्यंत प्रिय है।

भारतीय नृत्य शैली-

भारतीय पुराणों में यह दुष्टनाशक एवं ईश्वर प्राप्ति का साधन माना गया है ।अमृत मंथन के पश्चात जब दुष्ट राक्षसों को अमरत्व प्राप्त होने का संकट उत्पन्न हुआ तब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर अपने *लास्य नृत्य के द्वारा ही तीनों लोकों को राक्षसों से मुक्ति दिलाई थी। भारतीय संस्कृति एवं धर्म आरंभ से ही नृत्य कला से जुड़े रहे हैं। नृत्य का प्राचीनतम ग्रंथ भरतमुनि का नाट्यशास्त्र है जिससे पता चलता है कि प्रागैतिहासिक काल में नृत्य की खोज हुई थी। यजुर्वेद में भी नृत्य संबंधित सामग्री प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है नृत्य को उस युग में व्यायाम के रूप में माना गया था शरीर को आरोग्य रखने के लिए नृत्य कला का प्रयोग किया जाता था पुराणों में भी नृत्य संबंधी अनेकानेक उल्लेख मिलते हैं।

श्रीमद्भागवत महापुराण, शिव पुराण तथा कुर्मा पुराण में भी नृत्य का उल्लेख कई विवरणों में मिला है रामायण-महाभारत में भी समय-समय पर नृत्य का उल्लेख पाया गया है। कालिदास के शाकुंतलम्, मेघदूतम ,वात्सायन के कामसूत्र आदि ग्रंथों में नृत्य का विवरण हमारी भारतीय संस्कृति की कला प्रियता को दर्शाता है।

पाश्चात्य नृत्य शैली-

भारतीय ही नहीं अपितु पश्चिमी नृत्य कला का इतिहास भी प्राचीन संस्कृति में निहित है। पश्चिमी देशों में पोलैंड ,जर्मनी ब्रिटेन ,फ्रांस इत्यादि ऐसे देश हैं जिनकी अपनी एक विशिष्ट नृत्य शैली है। विभिन्न संस्कृतियों के मिलन से नई नृत्य शैलियों का उद्भव व विकास हुआ। आधुनिक पश्चिमी नृत्य में बैले, जॉर्ज , स्विंग, रॉक एंड रोल, ट्विस्ट ,हिप हॉप कांट्रा आदि प्रमुख पश्चिमी नृत्य है

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस का परिचय-

नृत्य की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए प्रत्येक वर्ष 29 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस मनाने की घोषणा की गई। अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस की शुरुआत 29 अप्रैल 1982 में हुई। यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय थिएटर इंस्टिट्यूट की अंतरराष्ट्रीय डांस कमेटी ने 29 अप्रैल को नृत्य दिवस के रूप में स्थापित किया ।एक महान रिफॉर्मर जीन जार्ज नावेरे के जन्म की स्मृति में यह दिन अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस मनाने का उद्देश्य-

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस
मनाने का मुख्य उद्देश्य नृत्य की महत्ता का अलख पूरे विश्व में जगाना तथा लोगों का ध्यान नृत्य की तरफ आकर्षित करना था। जिससे लोगों में नृत्य के प्रति जागरूकता फैले और आज आधुनिक समाज में भी कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोग जो कि नृत्यको हेय दृष्टि से देखते हैं ,वे नृत्य की महत्ता से वाकिफ हो सकें। आज पूरे विश्व में नृत्य को शिक्षा रुप में भी शामिल किया जा रहा है। सन 2005 में नृत्य दिवस को प्राथमिक शिक्षा के रूप में केंद्रित किया गया।

नृत्य की उत्पत्ति-

वैसे तो कहा जाता है कि जब बच्चा पैदा होते हैं और अपना हाथ पैर फेंक कर अपने अंग प्रत्यंग से अपने भावों की अभिव्यक्ति करता है वहीं से सामान्य तौर पर नृत्य की उत्पत्ति होती है ।किंतु इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि आज से 2000 वर्ष पूर्व त्रेता युग में देवताओं के विनती पर ब्रह्मा जी ने नृत्य वेद तैयार किया तभी से नृत्य की उत्पत्ति संसार में मानी जाती है इस नृत्य वेद में सामवेद अथर्ववेद यजुर्वेद ऋग्वेद से कई चीजों को शामिल किया गया जब नृत्य वेद की रचना पूरी हो गई तब नृत्य करने का अभ्यास सर्वप्रथम भरत मुनि के सौ पुत्रों ने किया।

नृत्य का लाभ-

आज प्रत्येक व्यक्ति फिट एंड फाइन रहना चाहता है इसके लिए उसे अच्छे खान-पान और एक्सरसाइज की आवश्यकता होती है।
अच्छे खान-पान के साथ यदि अपनी दिनचर्या में नृत्य को शामिल कर लें तो यह किसी एक्सरसाइज से कम कारगर नहीं है यह भी हमें फिट एंड फाइन रखने का एक अत्यंत सरल व स्वाभाविक तरीका है। नृत्य के न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य लाभ भी होता है ।अध्ययन बताते हैं कि डांस को वजन कम करने से लेकर मांस पेशियों की टोनिंग और संज्ञानात्मक क्षमताओं में सुधार करने के लिए किया जाना चाहिए।

नृत्य से होने वाली हानि-

व्यायाम खेल आदि की भांति ही नित्य को भी कुछ सावधानियों के साथ ही किया जाना चाहिए यदि नृत्य को असावधानी के साथ किया जाए तो यह लाभकारी की जगह हानिकारक भी हो सकता है।
असावधानीपूर्वक नृत्य करने से निम्न तरह के खतरे हो सकते हैं-
1-पैर टांग और टखने में चोट
2-कूल्हे की चोट
3-घुटने की चोट
4-स्ट्रेस फै्रक्चर
5-पीठ दर्द
6-अत्यधिक थकान
आदि
अतः नृत्य तभी फायदेमंद होगा जब हम इसे किसी जानकार की मदद से करते हैं।
रूमेटाइड गठिया, गठि, हाई बीपी ,हृदय रोग जैसे बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति डांस प्रैक्टिस के पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य ले।

अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस को कैसे सफल बनाएं-

व्यक्ति के शिक्षा और उसके आयोजनों में भागीदारी के लिए जन सामान्य को प्रोत्साहित करके इस दिवस को सफल बनाया जा सकता है इसके अतिरिक्त दुनिया के कोने कोने में इस दिवस को हर्ष उल्लास के साथ मना करके भी इस दिवस को सफल बनाने में हम एक अग्रणी भूमिका अदा कर सकते हैं।

2021नृत्य दिवस का थीम-

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस का हर वर्ष कुछ न कुछ थीम होता है 2021 का थीम था परपज ऑफ डांस यानि नृत्य का उद्देश्य इस थीम के माध्यम से लोगों को यह बताने की कोशिश की गई थी कि नृत्य करने से प्रत्येक तरह का तनाव दूर होता है।

2022 में कैसे मनाया जाएगा अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस-

अंतर्राष्ट्रीय* रंगमंच संस्थान द्वारा अतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस की 40 वीं वर्षगांठ का समारोह 29 अप्रैल 2022 शुक्रवार को ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा इस उत्सव में इस वर्ष 2022 के संदेश लेखिका कांग सू-जिन का एक वीडियो और कुछ नृत्य की प्रस्तुतियां प्रस्तुत की जाएंगी।

साधना शाही, वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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