गणतंत्र दिवस

अगर माताएंँ अपने बेटों को कुर्बान न करतीं, तो ममता से भरी भारत माता हुंकार न भरतीं।
गिले-शिकवे भुलाकर इंकलाबी गोली न खाते, तो कैसे हम सभी स्वतंत्र यह उश्वास ले पाते।
वतन के वास्ते जीना-मरना आसान नहीं है, वह क्या मरेगा जिसमें स्वाभिमान नहीं है।
आज़ादी जो मिली है उसको अब जाने नहीं देंगे, किसी आक्रांत को आंँख दिखाने नहीं देंगे।
बुरी नियत से जो भी हमसे टकराने को आएगा, मरेगा मौत कुत्ते का, लौटकर घर न जाएगा।

परम आदरणीय अध्यक्ष महोदय, प्रबंधक महोदय, प्रधानाचार्य महोदय, शिक्षक गण एवं हमारे देश के कर्णधार बच्चों आप सभी को 75 वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई। मैं साधना शाही आज के पावन पर्व के संबंध में संक्षिप्त जानकारी लेकर उपस्थित हूँ। आज का दिवस समस्त भारतियों (भारत माता) के लिए गर्व का दिवस है।

क्योंकि यही वह स्वर्णिम प्रभात है जब भारत अपने 75 वें गणतंत्र दिवस में प्रवेश कर रहा है। इस पावन पर्व पर भारत के राष्ट्रपति राजपथ पर जैसे ही ध्वज फहराते हैं वैसे ही सलामी के साथ परेड प्रारंभ हो जाता है। यह वह दिवस है जो हमें 75 वर्ष पूर्व के त्याग, बलिदान, का याद दिलाता है और

गणतंत्र का पर्व है पावन जाति- धर्म को मिटा दें। राष्ट्रोन्नत काम करें, गद्दारों को कड़ी सजा दें।।

का भाव प्रत्येक देशभक्त के अंदर जागृत करता है। भारत जब एक स्वतंत्र गणराज्य बनने हेतु भारत के ट्रांजिशन को पूर्ण ै किया। जब हम 15 अगस्त सन 1947 को गोरों से स्वतंत्र हो गए तब भी भारत ब्रितानियों के 1919’मोंटेग्यू चेम्स सुधार अधिनियम’तथा 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट का ही अनुकरण कर रहा था। इसी ने1949 में तैयार किए गए संविधान का नींव रखा और 26 जनवरी 1950 को हमने पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया

तथा-
गर्व करें स्व- संविधान पर, इसके बंदन में शीश झुकाएँ। आज देश गणतंत्र हो गया, आओ मिल हम इसे मनाएँ।


के गान से पूरा भारत गुंजायमान हो उठा। इसे 26 नवंबर 1949 को ही संविधान सभा द्वारा अपना लिया गया था किंतु दो माह बाद इसी तारीख को लागू किया गया इसके पीछे भी एक ऐतिहासिक कहानी है। इससे 20 वर्ष पूर्व 26 जनवरी 1930 को रावी नदी के तट पर पूर्ण स्वराज का मांँग किया गया था।

26 नवंबर 1949 को संविधान बनकर तैयार हुआ था और इसे स्वीकार किया गया था। इस महत्वपूर्ण दिवस को चिन्हित करने हेतु ही 26 जनवरी को भारत को गणतंत्रात्मक राष्ट्र के रूप में अंगीकार किया गया।


वैसे तो हमारे लिए हर गणतंत्र दिवस ख़ास होता है किंतु इस बार कर्तव्य पथ पर नारी शक्ति की झलक दिखाई देने से यह विशेष खास हो गया है।। परेड में पहली बार भारतीय सेना, नौ सेना, वायु सेना की एक-एक टुकड़ी, बी. एस. एफ. का मार्चिंग महिला दस्ता, बी. एस. एफ. महिला बैंड, आर्म्ड फोर्सेज महिला मेडिकल सर्विसेज, दिल्ली पुलिस की महिला टुकड़ी इस बार नारी शक्ति के वर्चस्व का प्रदर्शन करेंगी।


यह प्रदर्शन लैंगिक समानता, नारी आत्म निर्भरता की दिशा में एक अप्रतिम क़दम साबित होगा।
आज हमारे देश को गणतंत्र हुए 75 वर्ष हो गए किंतु यदि हम देश के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक स्थिति पर दृष्टिपात करें तो पाएंँगे कि आज भी हमारा देश सच्चे अर्थों में एक गणतंत्रात्मक देश नहीं हो पाया है।

इसे वास्तव में गणतंत्रात्मक बनाने के लिए हम सभी देशवासियों को एकजुट होकर ठोस कदम उठाकर देश से भ्रष्टाचार, अराजकता ,अलगाववाद, आतंकवाद, जातिवाद , भाषावाद जैसे दुष्प्रवृत्तियों के ख़िलाफ़ जनमत तैयार करने की आवश्यकता है। मानवता के संदेशवाहक एवं अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक आचार्य तुलसीदास का कहना था लोकतंत्र के प्रसाद का आधार स्तंभ अभय है ।

जहांँ जनता के मन में भय है वहांँ लोकतंत्र की नींव पड़ ही नहीं सकती। क्योंकि भय, तानाशाही, विषमता को जन्म देता है।आज हम सभी को भी एक ठोस कदम उठाना होगा हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझना होगा तभी देश आत्मनिर्भरता हासिल कर विकास के शीर्ष को स्पर्श कर सकता है और अंततः-

करें आज निश्छल स्वर से हम सत्यमेव जयते का घोष।
विश्व-शान्ति, बन्धुत्व भाव ले शमन करें नफरत, आक्रोश।।
ऋद्धि, सिद्धि, सुख, समृद्धि से द्विगुणित करके देश का मान।
राष्ट्रधर्म का बन संवाहक सद्वृत्तियों को करें प्रणाम।।

अंबेडकर, गांधी न लोहियावाद में बटें, मत जाति, संप्रदाय के कृपाण से कटें।
हो जाएगा उद्देश्य स्वतः पूर्ण हमारा, इंसान बनकर हम हर इंसान से सटें।

(भारत माता)

साधना शाही, वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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