कुष्ठ रोगियों के मसीहा , भारत जोड़ो आंदोलन के प्रणेता तथा त्याग ,तपस्या ,बलिदान ,साहस की मूर्ति बाबा आम्टे की पुण्यतिथि पर उन्हें शत- शत नमन !!🙏🙏🙏🙏🙏

बाबा आम्टे कुष्ठ रोगियों के मसीहा

हारे हुए को जो दे सहारा,
जरूरतमंद की मदद करें।
सच्चा संत वही है बंधु,
जिसकी अगुवाई डॉक्टर मुरलीधर आमटे करें।

बाबा आमटे जनता पुकारे,
दीनन के वो थे रखवारे।
नश्वर देह नष्ट हो गया,
दीपक सा किए जग को उजारे।

टेरेसा, बापू, भावे सा ,
नर में ही खोजे नारायण।
तन ,मन ,धन से किए वो सेवा,
साधक सा वर लिए वो आचरण।

पुण्यतिथि आज बाबा की,
हर्षोल्लास से जगत है मना रहा।
युवा पीढ़ी उनके सत्कर्मों से हो वाक़िफ,
इसीलिए पूरा विश्व है रमा रहा।

कुष्ठ रोगियों के बने मसीहा,
उनसे ना कभी वो घिन्नाए।
सेवा से सदा मिलती मेवा,
बात सदा यह सब को बताए।

नर्मदा घाटी के मछुआरों,
किसानों की वो बने आवाज़।
नर्मदा बचाओ आंदोलन पर,
किए बड़ा- बड़ा वो काज।

राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा आंदोलन,
मिली उसे बड़ी पहचान।
26 दिसंबर 1914 को,
जन्म लो इनका आप सब जान।

हिंगनघाट, वर्धा ,महाराष्ट्र में जन्मे,
सर्वत्र सुखी थे घर चाहे वन में।
लक्ष्मीबाई ,देवीदास के लाल,
भार्या साधना गुलेशास्त्री संग किए धमाल।

दीन -दुखी की सेवा में ही,
जीवन बीता मेवा में ही।
वेदना का वरदान मिला था,
इनको बड़ा ही ज्ञान मिला था।

युवा प्रेरणास्रोत इन्हें समझें,
नव निर्माण में सदा रहे उलझे।
सब के दुख- दर्द को जीए,
अंतिम सांसों तक ज़हर को पीए।

भेद-भाव सामाजिक बहिष्कार,
बना दिया उनको वफादार।
शानदार जीवन को त्यागे,
वकील का पेशा तजकर भागे।

गरीबी चुनना उनका था स्वेच्छा,
सेवा थी बस उनकी इच्छा।
तलाशे सदा उद्यम वो महान,
लाना चाहे उत्पीड़ित की मुस्कान।

दीन- हीन में मिले परमेश्वर,
भाग्य- विधाता और जगदीश्वर।
गर्भगृह में ना ईश्वर को पाएं,
विकृत कोढ़ी के हिय में जाएं।

मंत्रः न जपें न फूल चढ़ाएं,
निराशा में आशा के दीप जलाएं।
ना कभी पूजे वो देवों को,
सेवा कर पूजे घायल आत्माओं को।

निर्माण किए वो आनंदवन को ,
भोजन ,आश्रय जो दे हर जन को।
वह एक अद्भुत था विद्यालय,
स्वाध्याय, स्वाभिमान ,सेवा का शिक्षालय।

कुष्ठ रोगी जो हुआ हताश,
आनंदवन देता है उसे आस।
सम्मानजनक जीवन का बन गया केंद्र,
बाबा आमटे बने महेंद्र।

कुष्ठ रोग तब बना था श्राप,
करे बहिष्कृत समाज चुपचाप।
महारोगी सेवा समिति की किए शुरुआत,
कुष्ठ रोगियों की बने आवाज़।

कुष्ठ रोगियों के सशक्तिकरण में किए योगदान,
स्वतंत्रता सेनानी में भी इनकी पहचान।
बापू से थे बड़े प्रभावित,
उनकी प्रेरणा से हुए लाभान्वित।

अभय साधक का मिला उन्हें नाम,
कैदी बाला को बचाने का जब किए काम।
भारत जोड़ो अभियान चलाए,
देश की एकता को वो बढ़ाए।

राजगुरु के थे वो साथी,
वरे अहिंसा जब मिले गांधी।
भारत छोड़ो आंदोलन में हुए सम्मिलित,
देश की सेवा में हुए मुकुलित।

सामंजस्यपूर्ण संबंध बनाए,
मानव और सृष्टि के बीच।
असंतुलित और अदूरदर्शी विकास की ,
रहे सदा वो टांगे खींच।

युवा पीढ़ी जो बनी है दर्शक,
कुछ तो कार्य करो आकर्षक।
राजनीति लो हो प्रतिबद्धित,
सत्ता लेने से पूर्व बनो प्रदर्शक।

युवाओं में विश्वास जगाया,
वृक्ष की जड़ सा उन्हें बनाया।
राष्ट्र निर्माण में दिए भागीदारी ,
चुनौतीपूर्ण हर कार्य कराया।

उम्र 93 जब आया पास,
साथ छोड़ने लगा था गात।
किंतु मिशन और दृष्टि ना छोड़े,
यह भी बड़ी ही प्रेरक बात।

घेरा आकर उन्हें ल्यूकेमिया,
अस्पताल में ना हुए बंद ।
गैर राजनेता अडिग सदा रहे,
मृत्यु शैय्या से कर रहे थे द्वंद।

आज भी उनका मिशन है जिंदा,
लगा है उनका पूरा परिवार।
सबके सब दृढ़ संकल्प हुए हैं,
मिशन फैल रहा जग संसार।

फरवरी 9 सन 2008 ,
नया मार्ग प्रशस्त करने के बाद।
सौंप दिए सामाजिक दायित्व,
अंतिम विदा ले तज दिए साथ।

महारोगी सेवा समिति आज भी,
कर्तव्य व जिम्मेदारी निभा रही।
समर्पण और दृढ़ संकल्प से,
फैला वो चहुं विभा रही।

गात साथ को छोड़ चला है,
जिंदा आज भी कार्य व ज्ञान से ।
आदर्श विचार सदा रहेंगे जीवित,
जग सुरमित हो दूर अज्ञान से।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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