आज कहने को तो समाज बहुत विकास कर लिया है। किंतु आज भी कुछ घरों में बेटे और बेटियों के परवरिश, सुख सुविधा, प्यार और ममता में धरती-आसमान का अंतर महसूस किया जाता है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।दोनों एक ही कोख से जन्म लिए हैं दोनों के लिए एक समान ममता और प्यार होना चाहिए आज की मेरी कविता प्रत्येक बेटा और बेटी को समर्पित

1- आंँखें क पुतरी( भोजपुरी कविता)

हमार गुड़िया
हमरी आंँखे क पुतरी,
हमार गुड़िया

हमरी आंँखे क पुतरी ।
कुछु केहु करी लेओ
कुछु केहु कहि लेओ
लाखों जतन कर
आंँख से न उतरी
हमार गुड़िया
हमरी आंँखें क पुतरी
हमार गुड़िया
हमरी आंँखे क पुतरी।

हमरा ही गुड़िया में
दुनिया हमार बा
दुनिया हमार बा
हाँ, दुनिया हमार बा
गुड्डा के संगवा में
खुशी क खुमार बा
खुशी क खुमार बा हो
खुशी क खुमार बा
बसेला परान जइसे
पानी बीच मछरी
हमार गुड़िया
हमरी आंँखें क पुतरी।

हमरा ही गुड़िया में
जनवा हमार बा
जनवा हमार बा हो
जनवा हमार बा
तोहरा खा़तिर बेटा
सब कुर्बान बा
सब कुर्बान बा हो
सब कुर्बान बा
रहिया में आई काँटा
जाई उत उखरी
हमार गुड़िया
हमरी आंँखें क पुतरी।

2-हमार हऊव हो
(भोजपुरी कविता)

बेटा तूहंँही वजूद
हमार हऊव हो,
बेटा तूहहीं वजूद
हमार हऊअ हो।

तू ही हँसी हऊव हो
तूही खुशी हऊव हो
बेटा तूहही अस्तित्व
हमार हुऊव हो।

बेटा तूहंँही वजूद
हमार हऊव हो,
बेटा तूहहीं वजूद
हमार हऊव हो।

मीठी याद हउव हो
ईद क चांँद हउव हो
बेटा तूहही संझा
अउरी प्रभात हउव हो।

बेटा तूहंँही वजूद
हमार हऊव हो,
बेटा तूहहीं वजूद
हमार हऊव हो।

हमार मान हऊअ हो
तू सम्मान हऊअ हो
खिल जाए जेसे चेहरा
उ मुस्कान हऊव हो।

बेटा तूहंँही वजूद
हमार हऊव हो,
बेटा तूहहीं वजूद
हमार हऊव हो।

साधना शाही, वाराणसी

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By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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