नवमी के पावन तिथि को,
माॅं सिद्धिदात्री आईं।
ये हैं नौवीं देवी ,
हर सिद्धियाॅं लाईं।
ओम जय सिद्धि दात्री माता,
मैया जय सिद्धिदात्री माता।

शास्त्रीय विधि-विधान से ,
तुझको जहांँ पूजा जाता।
सभी सीद्धियाँ वो पाता,
कुछ ना अदम्य है रहता।
ओम जय सिद्धिदात्री माता,
मैया जय सिद्धिदात्री माता।

तू ब्रह्मांड की विजयी,
जग की निर्माता ।
तेरे गुण की महिमा ,
वेद- पुराण गाता।
ओम जय सिद्धिदात्री माता,
मैया जय सिद्धिदात्री माता।

देवाधिदेव ने पूजा ,
अष्ट सिद्धियाॅं पाए।
इनकी महिमा अनंत है,
अर्धनारीश्वर कहलाए।
ओम जय सिद्धिदात्री माता,
मैया जय सिद्धिदात्री माता।

चार भुजाओं वाली,
सिंह वाहन साजे ।
कमल- पुष्प तेरा आसन ,
दाएॕँ में भी विराजे ।
ओम जय सिद्धिदात्री माता,
मैया जय सिद्धिदात्री माता

भक्तों को तू तारे,
हर दुख- संताप हरे।
तेरी भक्ति जो करता,
मोक्ष को प्राप्त करे।
ओम जय सिद्धिदात्री माता,
मैया जय सिद्धिदात्री माता।

तेरी ज्योति से ज्योतित,
सकल धरा अंबे।
मुझे भी ज्योतित कर दे,
तू माॅं जगदंबे ।
ओम जय सिद्धिदात्री माता,
मैया जय सिद्धिदात्री माता।

सकल विश्व की पालक,
दुष्ट संहारक तू ।
तू है पालनहारी,
जग नतमस्तक होता।
ओम जय सिद्धिदात्री माता,
मैया जय सिद्धिदात्री माता।

अधम हैं तुझसे डरते,
सज्जन अरज करें ।
तेरी शरण जो आए ,
हर दुख,व्यवधान टरें ।
ओम जय सिद्धिदात्री माता,
मैया जय सिद्धिदात्री माता।

तेरे गुण की महिमा,
पार नहीं पाऊॕं।
मैं मूर्ख हूॅं माता ,
गुण कैसे गाऊॕं।
ओम जय सिद्धिदात्री माता,
मैया जय सिद्धिदात्री माता।

प्रथमा से दशमी का मुक्तक

1- शैलपुत्री

देखो- देखो ऐ भक्तों !
माँ शैलपुत्री आज आई हैं।
सफ़ल करने को,
तेरे हर काज आई हैं।।
करें बाघ की सवारी ,
पूजें हर नर- नारी।
जग से करने को दूर ,
सारे गाज आई हैं।

2-ब्रह्मचारिणी

तप और बल का दूजा नाम,
ब्रह्मचारिणी है।
पूज इन्हें लो भक्तों,
हर संकट की हारिणी है।।
दाएँ हाथ में शोभित माला,
बाम कमंडल धारिणी है।
आवाहन कर लो इनका,
यह मंगल कारिणी है।

3-चंद्रघंटा


माँ चंद्रघंटा अर्द्ध चंद्राकार है,
चंद्रघंटा माँ को सबसे ही प्यार है।
शांत, कल्याणकारी, सौम्य
रूप मांँ का अनुपम है,
उनकी कृपा से गांँव घर सभी दमदम है।
दानवता जब भी फैलेगी दर्शन होंगे तेरे,
मर्दन की फिर लहर चलेगी कोई दुष्ट न होंगे नेरे।

4- कुष्मांडा


कुष्मांडा माँ जो वर देती ,
वो है कभी न खाली जाता।
सारे जग का तम है मिटता,
हर घर में खुशहाली आता।।
आदिशक्ति का दिव्य रूप,
हर प्राणी का है दुख हरता।
भक्ति- भाव से जो भी पूजे,
भवसागर है झट से तरता।

5-स्कंदमाता


स्कंदमाता का दिन है पाचवाँ,
मांँ शेर सवारी आ जाओ।
भवबंधन को काट के क्षण में,
भक्तों को मुक्ति दिला जाओ।
भक्त हैं बैठे आस लगाकर,
मैया मेरी आएंँगी।
शुंभ- निशुंभ जो घर-घर जन्मे,
वो सबको पार लगाएंँगी।

6- कात्यायनी


हाथ जोड़ मैं कर रही विनती,
मांँ कात्यायनी आज तेरी।
घर-घर महिषासुर हैं जन्मे,
मर्दन कर बिन किए देरी।।
आज यदि ना आई तो,
चहुँ हाहाकार मच जाएगा।
मानव रूप में जन्मा दानव,
इस सृष्टि को खा जाएगा।

7-कालरात्रि

तू अनाथ की नाथ है माता,
शुभ फल की है दाता।
काले घने केश हैं तेरे,
तमस कभी नहीं आवे नेरे।
गुड़ पकवान जब तुझे चढ़ावें ,
मनवांछित फल सब पा जावें।

8-महागौरी


शिव को पाने की खातिर ,
तप करके हो गईं श्याम।
शिव ने गंगा जल जब डाला,
गौर वर्ण हुआ चाम।
गौरी को महादेव अपनाए,
आधा अंग थे उन्हें बनाए ।
श्वेत बैल की करे सवारी,
श्वेतांबरधरा है माँ कहलाए।

9-नौवाँ दिन है सिद्धिदात्री का,
सिद्ध करें हर काम।
प्रेम भक्ति से माँ को पूजेँ ,
बिन पूजे ना आराम।
शीश मुकुट पैरों में पायल,
मैया छम- छम करती।
इनकी रटन लगा लो भक्तों,
हर कष्टों को हरती।

10-दुर्गा पूजा


वक्त पड़े तो एक ही नारी ,
हो जाए कई महिषासुर पर भारी।
दुर्गा पूजा हमें सीखाता,
साहस धैर्य रखना बतलाता।
कितना भी मुश्किल क्षण आए,
हे नारी! तू ना घबराए।
दुर्गा सा अंतिम तक लड़ना,
महिषासुर का मर्दन करना।
शुभ- निशुंभ का होवे अंत,
प्रफुल्लित होवे दिक्-दिगंत।
अंत में होगी तेरी जीत,
नारी ना हो तू भयभीत।

10-विजयदशमी
अनगिनतत रावण जला दिए,
अब तक नहीं मरा वो।
भला मरेगा भी वो कैसे,
घर-घर में है धरा वो।
ईर्ष्या, द्वेष,लोभ, व्यभिचार,
चहुँओर करे तांडव।
इसका मर्दन होना तब संभव,
जब धरा पर आए मांडव।
मांडव आकर रघुनंदन सा,
असुरों का यदि नाश करें।
तभी दशहरा होगा सार्थक,
जन- मानस में उजास भरें।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *