अहिंसाअहिंसा के मार्ग पर चलकर महात्मा गांधी ने लोगों को जिन्दगी में सही मार्ग पर चलने का संदेश दिया है।

“अहिंसा ही परम दान ,परम संयम ,परम यज्ञ, परम फल, परम मित्र तथा परमसुख है”

~वेदव्यास

आज जब हम विश्व पटल पर नजर डालते हैं तो पाते हैं आज चारों तरफ हिंसा का बाहुल्य है। आज का युग अनावश्यक हिंसा का युग बन गया है। आज बेवजह जीवों की हत्या हो रही है और हिंसा करना आज मनुष्य का शौक बनता जा रहा है। धीरे-धीरे यह शौक आज मनुष्य की जीवन शैली का रूप लेता जा रहा है।

हम अहिंसा के महत्व को पूरी तरह भुला दिए हैं, हम भूल गए हैं कि अहिंसा ही वह मार्ग है जिस पर चलकर हम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को साकार कर सकते हैं। क्यों? क्योंकि, यह वह सूत्र है जो भारतवर्ष से प्रारंभ हुआ और संसार की सर्वोच्च संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ ने मान्यता प्रदान कर दिया। आज जबकि चारों ओर हिंसा का बाहुल्य है ऐसे में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म दिवस ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के रूप में मनाया जाना हम भारतवासियों के लिए गर्व की बात है। हिंसक प्रवृत्ति मानव को दानव बना देती है और उसे एक सामान्य मनुष्य से कालसौकरिक  कसाई बना देती है। साम्राज्य विस्तार में हिंसा के बाहुल्यता को देखते हुए ही सेमुबल बैकेट का कथन है कि -“आज की दुनिया में आंसू बहना कभी भी थम नहीं रहा है। एक शख्स की आंख में वो थमता है तो कहीं दूसरे की आंख से बहने लगता है।आज हिंसा जीत का हथियार बन चुकी है, जिसका ज्वलंत उदाहरण है तालिबान, जिसने हिंसा के बल पर ही अफ़गानिस्तान पर अपना आधिपत्य जमा लिया। हम हिंसा के मार्ग पर चलकर कितना भी धन वैभव संपदा अर्जित कर ले, किंतु, आत्मिक सुख हमें अहिंसा ही प्रदान करती है जिसका ज्वलंत उदाहरण है सम्राट अशोक जिन्होंने अपने जीवन काल में अनेकानेक युद्ध कर चक्रवर्ती सम्राट की उपाधि अर्जित किया तथा साम्राज्य विस्तार किया किंतु उन्हें आत्मिक सुख तभी प्राप्त हुआ जब वे धर्म अर्थात अहिंसा के शरण में गए। क्योंकि अहिंसा एवं शांति के लोग भी मी गति से भले ही जलती है किंतु व अहिंसा से बेहतर एवं कारगर है अहिंसा दिवस की योजना इस मद्धिम होती प्रकाश को तीव्र रोशनी एवं प्रेरणा प्रदान करती है। अहिंसा की महत्ता के कारण ही अफ्रीकी अमेरिकी नागरिक अधिकारों के संघर्ष के नेता मार्टिन लूथर, रंगभेद के खिलाफ लड़ने वाले नेतानेलसन मंडेला तथा अल्बर्ट आइंस्टाइन जैसे चर्चित हस्तियों में भी इसका शुमार है।

इस प्रकार निष्कर्ष तक हम यही कह सकते हैं कि अहिंसा मनुष्य के लिए प्राणवायु ऑक्सीजन की भांति  है  यह प्रकृति, पर्यावरण, पृथ्वी ,पानी और प्राणी मात्र  की रक्षा करने वाली है। अतः आज आवश्यकता है कि शांति, अहिंसा और मानवाधिकारों की बातें जो संसार में हो रही हैं उनके स्थान पर सम्यक आचरण को जीवन शैली में शामिल किया जाए तभी अहिंसा दिवस मनाना सार्थक होगा। क्योंकि महात्मा गांधी के दर्शन का मूल मंत्र भी यही था कि- “अहिंसा एक दर्शन है एक सिद्धांत है एक अनुभव है जिसके आधार पर समाज को बेहतर बनाया जा सकता है|”

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Image Reference: https://www.amarujala.com/columns/blog/mahatma-gandhi-birth-anniversary-2021-special-the-power-of-mahatma-gandhi-communication-skill

By Unnati Shahi

Author of INDRIYANUBHAV by Griffin Publications Co author of books, YES, WE DID! by Griffin Publications and SHADOWS OF THE PAST ARE WINGS OF THE FUTURE by Rosewood Publications. Awarded with Rabindranath Tagore Literature Award and Bhartiya Pratistha Purashkar An aspiring Content Specialist with a demonstrated history of working as a blogger, content writer and anchor. Skilled in Extemporaneous Speaking, Communication, lyrics and script writing, motivational speaking, Singing, and Anchoring. Pursuing BAJMC course focused in Mass Communication/Media Studies from Banasthali Vidyapith.

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