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जीने की कला सिखाते कान्हा( कविता)

जकान्हा न्माष्टमी प्रतिवर्ष है मनता,झांँकियाँ भी हैं सजतीं।संदेशों का ना कर पालन,ना समझी चहुँ दिखती। मुरलीधर व्यक्तित्व अनूठा,अतीत में वो थे आए।भविष्य को वो कर दिए उज्जवल,सन्मार्ग दिखलाए। कान्हा की…