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राष्ट्र उन्नत बेजान पड़ा : एक कविता देश मे हो कर भी देश के ना होने वालों के नाम

प्रांतीयता के विष के आगे,भुजंग विष है मंद पड़ा।उन्नति चाहे निज प्रांत की,राष्ट्र उन्नत बेजान पड़ा। राष्ट्रहित की कर तिलांजलि,प्रांत हित में बस लगे रहे।सबकी अपनी सेना बन गई,संकीर्णता में…