माॅं का जन्मदिन

माॅं जो दुनिया का श्रेष्ठ संबोधन व श्रेष्ठ रिश्ता है
जिससे बढ़कर दुनिया में कोई नहीं है।
यह ममता का सागर है, जो अपने बच्चो को किसी भी बुरी परिस्थितियों में नहीं देख सकती, अगर बच्चों को कुछ हो जाए तो दर्द सबसे पहले माँ को ही होता है। जब भी कोई कठिनाई आती है तो हमेशा माँ उसका सामना करती है।
कुछ विद्वान मानते हैं माँ का मतलब मै + आ अर्थात मैं मतलब परमशक्ति और आ का मतलब आत्मा इस प्रकार माॅं शब्द का अर्थ हुआ ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति जिसके माध्यम से परमेश्वर अपने अंश द्वारा अपनी शक्ति का संचार और विस्तार करता है।
माँ के बारे संस्कृत व्याकरण कहता है मां, म से बना है। इस प्रकार माॅं शब्द म और मां दोनों से बना माना जाता है। मा शब्द के संस्कृत में दो अर्थ बताए गए हैं। मा का एक अर्थ है मत (करो)। लेकिन
जन्मदायिनी माॅं इस मा अक्षर से नहीं बना है। मा अक्षर का जो सबसे निकटतम अर्थ पुराण बताते हैं, वो है लक्ष्मी। संभवतः इसी मा (लक्ष्मी) से माॅं बना है। क्योंकि, लक्ष्मी पालन करती हैं, माॅं भी शिशु का पालन करती है। इस तरह देखा जाए तो माॅं लक्ष्मी का ही एक रूप है। आज मेरी माॅं के जन्मदिवस पर आज की मेरी कविता इसी लक्ष्मी स्वरूप माॅं को समर्पित जिसका शीर्षक है-
माॅं का जन्मदिन🙏🙏🙏🙏

अस्तित्व दिया है तूने मुझको,
हम भला क्या देंगे तुझको।

जग से सुंदर तेरा आंचल,
ज्यूॅं मोहित करता अरुणांचल।

जग में तम फैला घनियारा,
तूने दूर किया अंधियारा।

अश्क से आंखें भरी हों जब भी ,
तेरी याद ही आती तब भी।

तू है एक मसीहा जैसी,
मंगलकारी ईश के तैसी।

जीवन हो आपका पुष्प सा सुरमित,
चंदा सूरज की चमक हो सम्मिलित।

सलामत रहे आपकी जिंदगानी,
जब तक नदियों में हो पानी।

आज आपका दिवस अवतार,
करें बधाई को स्वीकार।

भानु सदा प्रकाश फैलाए,
मयंक शीतलता लेकर आए।

जीवन हो तेरा मधुमास सा,
प्रसन्नता तेरा हो आकाश सा।

अरुण की किरणें तेज दें आपको,
जूही खुशबू भेज दे आपको।

‌शुभ हो जन्मदिवस यह तेरा,
हॅंसी खुशी का लाए डेरा।

हम सब को यह सदा ही जोड़े,
कोई रिश्ता मुॅंह ना मोड़े।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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