ऐ राही !मेरी बात समझ ले,
राह में कभी भी ना डरना,
विघ्न बाधाएं जितनी आएं,
उन सब से तू झट लड़ना।

लक्ष्य तुझे यदि लगे दूर,
और कोई राह नहीं सूझे,
ध्येय कभी भी ना तज देना,
बात सदा तू ये बूझे।

कठिन राह पर चलते -चलते,
चोट यदि तुझको लग जाए,
उस पीड़ा का ध्यान न देना,
तब ही मंजिल को पा पाए।

बढ़ गए कदम मंजिल की ओर तो,
पीछे कभी कदम हटाना ना,
पर्वत – पाहन लाॅंघ फाॅंदकर,
जीत को हासिल कर जाना।

नज़र सदा तुम लक्ष्य पर रखना,
उसका ही माला जपना,
तूफ़ान लाखों राह में आए,
डरकर ना पीछे हटना।

औरों की तुम सुन भले लेना,
करना पर अपने मन की,
बुरी शिक्षा को ग्रहण न करना,
संग न तजना स्व-विवेक की।

स्व-विवेक के साथ रहे तो,
जीवन सफ़ल हो जाएगा,
काॅंटे सारे पुष्प बनेंगे,
सकल धरा महकाएगा।

साधना शाही ,वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *