माई- माई करत- करत बीत जाला दिनवा,
तबो नाहीं अईलू माई हमरा अँगनवा।

माई के खा़तिर हम त हलुवा बनवलीं,
संगवा में अऊरी बनवलीं हम त चनवा।
तबो नाहीं अईलू माई हमरा अंँगनवा।

माई- माई करत- करत बीत जाला दिनवा,
तबो नाहीं अईलू माई हमरा अँगनवा।

माई के खातिर हम त चुनरी मंँगवलीं,
संगवा में अऊरी मँगवलीं,
हम लहंँगवा।
तबो नाहीं अईलू माई
हमरा अंँगनवा।

माई- माई करत- करत बीत जाला दिनवा,
तबो नाहीं अईलू माई हमरा अँगनवा।

माई के खातिर हम त चुड़िया मंँगवलीं,
संँगवा में अऊरी मँगवलीं,
हम कंँगनवा।
तबो नाहीं अईलू माई
हमरा अंँगनवा।

माई- माई करत- करत बीत जाला दिनवा,
तबो नाहीं अईलू माई हमरा अँगनवा।

माई के खातिर हम बेला फूल मँगवलीं,
सँगवा में अऊरी मँगवली गुड़हलवा,
तबो नाहीं अईलू माई
हमरा अंँगनवा।

माई- माई करत- करत बीत जाला दिनवा,
तबो नाहीं अईली माई हमरा अँगनवा।उ

2-स्कंद माता भजन

माह आश्विन, शुक्ल पक्ष,
तिथि पंचमी जानो।
माँ स्कंद को पूज के,
इनकी महिमा को बखानो।

राजा हो या रंक किसी में ,
माँ ना करती भेद।
अनुकंपा सब पर बरसाती,
कोई ना करता खेद।

मेरी लेखनी सफल बना मांँ,
कृपा की दे- दे भेंट।
आलस, प्रमाद जो हों जीवन में,
सब कुछ जाए मेट।

मूक बधिर भी पूज के तुझको,
वाणी का लाभ उठाएँ।
पंगु भी यदि पूज ले तुझको,
झट पर्वत चढ़ जाए।

जब-जब धरा पर पाप बढ़ा,
तूने जन्म लिया है।
पापी का मर्दन किया तूने,
भक्तों को शरण दिया है।

माथे पर तेरे मुकुट विराजे,
गले मोतियन की माला।
रिद्धि-सिद्धि सिद्धि तेरे द्वार विराजे,
स्कंद हैं तेरे लाला।

भक्तों को शुभ- लाभ है देती,
उनकी नैया है खेती।
अन्न- धन से घर भर देती,
बदले में भक्ति बस लेती।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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