बंजर सा मेरा जीवन था,
उर्वर उसको तूने बनाया।
कोई रंग नहीं था इसमें,
चटकीले रंगों से सजाया।

यूँ लगता कल की तू जाई,
बीस साल की आज हुई।
मेरे इस जीवन उपवन का,
बेटा तू सरताज हुई।

मेरी सच्ची साथी है तू,
सुख- दुख तुझसे बाँटूँ मैं।
नील गगन को छू मेरी लाडो,
पूर्ण सपनों संग जीवन काटूँ मैं ।

प्रात के नभमंडल में बिखरी,
अंशुमान की आभा मेरी।
रजनी में शीतल चांँदनी बिखेरे,
ऐसी तू प्रतिमान घनेरी।

कभी अमावस जीवन में आए,
पूनम शशि बन हरण तू करना।
रवि मयूख जब लगे जलाने,
शीतलता का आवरण बनना।

राग, रंगहीन जीवन में,
रस, छंद ,अलंकार बन जाना।
जहांँ न सोच पहुंँच सके मेरी,
यश उसके तुम पार ले जाना।

मेरी कविता का वर्ण्य विषय तू,
संस्कार बेटा तू मेरी।
मेरे निरुद्देश्य जीवन का,
पतवार तू है प्रभु चेरी।

वत्सला के सभी रंग ,
कूट-कूट तुझमें भर जाए।
ममता, भक्ति, उचित श्रृंगार,
उचित समय पर वर कर जाए।

तू मेरा यश, मान, प्रतिष्ठा,
तू हर पल का चैन है बेटा।
महकती अद्भुत सांँझ हमारी,
हर अवगुण पर बनना जैन तू बेटा।

शुभ हो जन्मदिवस आज तेरा,
सभी तुझको दें आशीषों का उपहार।
खुशी, यश, मान, प्रतिष्ठा तेरा,
फैले जग में नित अपरंपार।

जीवन की तेरी हर घड़ियाँ,
सुनहरे भविष्य की ओर चलें।
दुख, व्यवधान हेरंब सब हर लें,
देव-कृपा की सदैव डोर मिले।

शूल तेरे जीवन के दूर हों,
फूल से सदा भरे तेरा आंँगन।
सद्वृत्ति ,सत्कर्म करे तू,
मिले तुझे सब कुछ मनभावन।

तू है मेरी राजकुमारी,
तू मेरे जीवन का सपना।
हर पल पर तुझे मिले सफ़लता,
सदा हंँसते- मुस्कुराते तू रहना।

शुभ हो तेरे जीवन का हर पल,
शुभ हों तेरे सारे कर्म।
शुभ हो तेरा जन्म दिवस यह,
अनवरत परिश्रम हो तेरा धर्म।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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