1-
गोपाष्टमी मुक्तक

गायों के सेवा कर जाएँ,
जीवन अपना सफ़ल बनाएंँ। गोपाष्टमी ऐसा त्योहार,
जिस दिन पूजें गायों का परिवार।

गौ माता को पूजकर जीवन सफल बनाएंँ,
स्वर्ग-नर्क का बंधन छूटे बैकुंठ धाम को जाएंँ।

मैया को हम कुछ ना देते वो हमें सदा हैं देंती,
सब कुछ देकर वो हमसे बस मानवता कुछ लेतीं।

2-
गोपाष्टमी
कब क्यों और कैसे?

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के अष्टमी तिथि का सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस दिन को सनातन धर्म में गोपाष्टमी के नाम से जाना जाता है।
यह दिन ब्रज, गोकुल, मथुरा, वृन्दावन, द्वारकाधीश और पुरी में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ समर्पित होकर मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण के रूप का पूजन विधि-विधान से किया जाता है।
लोगों का ऐसा विश्वास है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से घर- परिवार में सुख- शांति, समृद्धि ,संतति की प्राप्ति होती है। मनुष्य हर तरह के कष्टों से मुक्त हो जाता है।

यदि हम श्रीमद्भागवत की मानें तो भगवान श्रीकृष्ण बाल्यावस्था में गायों और बछड़ों के संग खेला करते थे। यही वह दिवस था, जिस दिन भगवान श्री कृष्ण को गौ को चराने हेतु वन में भेजा गया था। अतः इस दिन साधक प्रातः काल उठकर अपने घर की पूरी तरह सफ़ाई करता है। स्वयं स्नान करके शरीर, मन, और कर्म से शुद्ध होकर
गौ तथा बछड़ों को स्नान कराकर जल, अक्षत, रोरी, फूल, माला, चंदन इत्यादि चढ़ाकर उनका भक्ति भाव से पूजा करता है। उन्हें नए वस्त्रों और घंटियों से सजाया जाता है,
उसके बाद गाय और बछड़े को रोटी गुड़,फल, मिठाई इत्यादि जो कुछ भी बन पाए सब कुछ खिलाया जाता है। यदि हमारे घर में गाए नहीं हैं तो गौशाला में, आस- पड़ोस में, कहीं पर भी गायोंऔर बछड़ों का पूजा ऊपर बताए गए विधि के अनुसार कर सकते हैं।
तदुपरांत धूप- दीप से उनकी आरती की जाती है। उसके पश्चात उन्हें चरने के लिए भेज दिया जाता है।
गायों को चरने के लिए भेजने के पश्चात भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराया जाता है, उसके बाद खीर, पूरी ,हलवा, फल- फूल इत्यादि से अपनी श्रद्धा- भक्ति और सामर्थ्य के अनुसार जो भी हो पाए उसका भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाया जाता है।
अंत में श्री कृष्ण को तथा सायंकाल जब गौवें चरकर घर वापस आएंँ तो उन्हें साष्टांग प्रणाम कर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है, गायों के चरण रज से तिलक लगाया जाता है ।ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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