माॅंग कर देखो अपना हिस्सा,
बन जाएगा लाखों किस्सा।
घर में होगा धूम- धड़ाम,
जमघट ले लेगा आवाम।

बेनकाब होंगे सब अपने ,
साॅंप सॅंपोले थे सब जितने।
बेचैनी घर कर जाएगी,
नई- नई युक्ति आएगी।

छोड़ कर देखो अपना हिस्सा,
बीघा दो बीघा कुछ बिस्सा।
फूलों से सब मुस्काएंगे,
बच्चे से सब चहचहाएंगे।

सबका चेहरा होगा खिला,
मानो मुॅंह माॅंगा मुराद मिला।
काॅंटे गुलाब से प्यारे होंगे,
किस्से सारे न्यारे होंगे।

हिस्से में है बड़ा ही दम ,
लेता खुशियाॅं, देता गम।
अच्छा संबंध ही इसका भोजन,
ना करता रिश्तों का योजन

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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