आज 30 अप्रैल राष्ट्रीय इमानदारी दिवस के अवसर पर ईमानदारी की विशेषता व महत्ता बताती हुई मेरी आ की कविता
ईमानदारी

गए ब्रितानी मूर्ख बनाकर,
आज भी है यह सूर्ख।
ज्यूॅं ही आया अप्रैल महीना,
दिवस मनाएं मूर्ख ।

इस खाज को चलो भुला दें,
इमानदारी दिवस मनाएं।
30 अप्रैल वह शुभ दिन है,
जब यह सद्विचार फ़ैलाएं।

एम हिर्श गोल्डबर्ग एक लेखक थे,
1990 के दशक में बुक ऑफ लाइज लिख डाले।
इस पुस्तक का एक प्रयोजन,
इमानदारी धरा पर फैला लें।

पहली बार वो यह दिवस मनाए,
मानव में गुणवत्ता फैलाए।
मानव का यह है मॅंहगा गुण,
दुर्लभ इसको नहीं बनाए।

यह है मन को शांति देता,
अशांति देता झूठ सदा।
कर्तव्यनिष्ठ यह हमें बनाता,
ना होती कोई हमसे खता।

रिश्तो को मजबूती देता,
संबंध विच्छेद रुक जाता है।
गाॅंव, गली ,कुटुंब सब ही में,
हर्षोल्लास फैलाता है।

इसको जीवन में अपनाकर,
पूर्ण मुक्त जीवन की ओर हम जाते।
यह उपहार बड़ा ही मॅंहगा,
जो अतिप्रिय उसको ही दे पाते।

साधना शाही,वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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