परिष्कृत कर लें विचार शक्ति को,
जीवन सफल बनाएंँ।
अँधियारा का समूल नाश कर,
उजियारा फैलाएंँ।

सोच के जैसा जीवन होता,
इसी से हंँसता, इसी से रोता।
यह जीवन खुशहाल बनाता,
मैय्यत भी यह ही है लाता।

जग में विकास यदि करना है तो,
उत्तम विचार के बन जाएँ साथी।
दीन- दुखी की कर लें सेवा,
बन जाएँ हम सब परमार्थी।

उत्तम बीज पौध उत्तम हो,
वैसे ही उत्तम हों विचार।
नेकी करके जहांँ से जाएंँ,
प्यार से मिल जाए कांँधे चार।

विचार के जैसे कर्म बनेंगे,
कर्म सी ही होंगी परिस्थितियाँ।
परिस्थितियाँ ही यश दिलवातीँ ,
अपयश की भी ये ही साथी।

इसीलिए तो कहते यारों,
परिस्थितियों का दास मनुज।
अग्रज, अनुज सब जान समझ लो,
इसी से मानव बने दनुज।

परिस्थितियों का निर्माता मानव,
नियंत्रणकर्ता और स्वामी भी है।
वास्तविक शक्ति नहीं साधन में,
विचारों में द्रुतगामी सी है।

लोगों के मुख से यह सुना है,
मस्तिष्क में भाग्य का लेखा-जोखा।
उत्तम विचार से शुभ यह होता,
अधम से नर्क का बीज है बोता।

मानसशास्त्र आचार्य ये कहते,
विचार पद्धति ही भाग्य आधार।
विचार प्रेरणा सही दिशा तय करते,
सत्कर्मों का यही आधार।

मनुष्य ही अपना भाग्य निर्माता,
विध्वंसक भी हम खुद ही हैं।
आंतरिक बल, पुरुषार्थ विचार हैं,
इसी से ही आँखें नम हैं।

तदनुरूप प्रगति होती है,
विकृत कल्पनाएंँ करतीं इसे नष्ट।
स्वयं संकट के बनते निर्माता,
उम्मीदें सब होतीं ध्वस्त।

लक्ष्य मार्ग इंद्रिय शक्ति से जाता,
दुर्विचार से होतीं नष्ट।
दुर्विचार को झट तज दें हम,
वरना हो जायेंगे हम प्रथभ्रष्ट।

रावण बड़ा ज्ञानी पंडित था,
सत्पुरूषों सा ना था चिंतन।
व्यवस्थित चिंतन को छोड़ दिया वह,
तभी तो वह था बना अकिंचन।

लोलुपता उसने अपनाया,
अस्त- व्यस्त विचार बनाया।
ज्ञान का लाभ न मिला किसी को,
संकीर्ण स्वार्थ को मित्र बनाया।

हीन कर्म का बन गया साथी,
आदर्शनिष्ठ चिंतन बना न थाती।
जग आवश्यकता के ढेरों कार्य,
प्रतीक्षा में ही रहे दिन राती।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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