अपने हौसलों के दम पर ,
तुमने अपनी प्रज्ञा दिखाया है।
बना – बनाया मंच ना मिला तुझको ,
तूने अपनी मेहनत से बनाया है।

जिसने तुझको है नकारा,
सितारा बन दिखा देना।
धूल ना समझें किसी को,
उनको यह सिखा देना।

अमावस को बदल पूनम में,
रातें जगमगा लेना।
चमको जहाॅं में तुम इतना,
कि खुद को सूरज बना लेना।

राह कितनी भी कठिन हो,
सरल उसको समझ कर चलना तुम।
पत्थरों को काटकर,
रास्ता अपना बना लेना।

भाग्य में सब कुछ नहीं लिखते,
जगत के पालनहार।
खुद की भुजाओं के ही दम पर ,
जीत सकते हैं संसार।

प्रकृति आंधियों से डरकर,
है कभी झुकती नहीं।
उद्यमी यदि ठान ले कुछ,
बिन पूर्ण वह रूकती नहीं।

निरुद्यमी, अकर्मण्य मानव,
भाग्य के भरोसे बैठ जाता।
नियतिवाद का ले आच्छादन,
गर्त में वह पैठ जाता।

ना अदृशष्टवाद पर करो भरोसा,
निज कर्म पर विश्वास रख।
आज, कल, संपूर्ण जीवन में,
तू फतह का स्वाद ले चख।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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