नेत्र से आंसू छल- छल छलके,
मुंह पर रखें हाथ।
जुबान नारी को श्रेष्ठ बनाता,
देता यही आघात।

शोध जगत से पता चला है,
सच्ची बात यह जानो।
जुबान महिला को गुनाहगार बनाती,
इसकी हद पहचानो।

शब्दों को नहीं तोला जिसने,
मुंह से उसे निकाला।
घर को घर ना रहने दिया वो,
कुरुक्षेत्र कर डाला।

जुबान ही घर को स्वर्ग बनाता,
यही बनाता जहन्नुम।
मीठी वाणीे सबको भाती,
फैलाए चहुं तरन्नुम ।

आओ नर की बात करें अब,
दोष है इसका कम ना।
निगाह को वश में यदि यह कर ले,
फैले कहीं भी तम ना।

तामसी निगाहें जिस पर पड़तीं ,
वह नारी सहम है जाती।
धैर्य का बंधन टूट है जाता,
वो कुल्टा कहलाती।

कुलीन सुलक्षणी भी नारी,
कुलक्षिणी हो जाती।
शिक्षा – दीक्षा छोड़ के वह,
घर की दासी बन जाती।

वासना से भरी निगाहें,
जब भी पुरुष है डाला।
दूध से धुला है वो रह जाता ,
नारी को पतित कर डाला।

नारी की जुबान हो मीठी,
सात्विक पुरुष की नज़रें
यश फैले चहुंओर जहां पर,
छाएं सुखद सी खबरें।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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