माँ भी मुस्कुराना चाहती है,
उसके साथ बैठकर मुस्कुरा लो ना।
वो भी खुशी के गीत गाना चाहती है,
उसके संग बैठकर तुम भी गा लो ना।
क्यों? क्या? कैसे? सदैव क्यों करते हो?
कभी इसके भी मन को तुम पा लो ना।
यह भी जिंदगी में चहकना चाहती है,
इसके संग भी थोड़ा निबाह लो ना।
यह कभी फूल तो कभी कली है,
इसकी खुशबू से घर को महका लो ना।
यह भी प्रेम की गली में गुनगुनाना चाहती है,
इसके संग बैठकर प्रेम के गीत गुनगुना लो ना।
यह भी हंँसी- ठहाको से घर को गूँजाना चाहती है,
इसके भी साथ बैठकर ठहाके लगा लो ना।
आज माँ के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर,
हैप्पी बर्थडे टू यू मांँ गा लो ना।
इस एक पंक्ति को गाकर,
मांँ के अंतर्मन को हुलसा लो ना।
2-
फूल हजारों जब मिलता है,
तब माला बन जाता है।
बूंँद- बूंँद पानी जब मिलता,
तब सागर कहलाता है।
दीप हजारों जब मिलते हैं,
देवाराधन हो पाता है।
माँ ऐसा व्यक्तित्व जगत में,
जिससे जीवन धन्य हो जाता है।
आज तुम्हारे जन्म दिवस पर,
अनंत बधाई तुमको माँ।
आरोग्यता दीर्घायु गहो तुम,
ममता की सदा मिलती रहे छांँव।
3-
रुके तो वक्त थमता है,
चले तो जगत चलता है।
माँ तो चीज है ऐसी,
कि जिससे वक्त रुकता है।
कहते हैं कि वक्त किसी का,
इंतज़ार नहीं करता।
पर वो भी मांँ को कभी,
लाचार नहीं करता।
मांँ जो हाथ धरे मस्तक पर,
सारे दुख भाग जाते हैं।
हुआ अनादर यदि इसका तो,
ठौर कहीं ना पाते हैं।
सभी की फ़िक्र वो करती,
न जाने क्यों नहीं थकती।
बचे- खुचे को खा करके,
वो संतुष्ट है होती।
खुद गीले पे सोती है,
सूखे पर हम हैं सोते।
फिर भी ठंड ना लगता,
लगते खुशी के हैं गोते।
क्या वो जादूगरनी है,
कभी उसे ठंड न लगती।
अंत में वह जब खाती है,
क्या उसको भूख न लगती।
पुराने वस्त्रों में भी वो,
परी जैसी है वो दिखती।
जगत में मांँ के जैसा,
भला और कौन है हस्ती।
जिसे कड़वा भी बोलो तो,
वो आशीष देती है।
कभी दिल पर ना लेती है,
सदा बक्शीश देती है।
जब बच्चा दूर जाता है,
तो उसकी राह तकती है।
जब उसका फ़ोन आता है,
ख़ुशी से वो चहकती है।
जगत इससे बना है या,
जगत से मांँ बनी होगी।
ईश्वर भी हैं नतमस्तक,
यह उनसे भी बड़ी होगी!

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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