1-मन

मन मीत भी है,यही प्रीत भी है,
इससे ही है खुशियांँ और गम।
इससे ही हर रिश्ते- नाते,
इससे ही तुम इससे ही हम।

यह प्रेम भी है, विश्वास भी है,
हर जीवन की यह आस भी है।
इसको उज्जवल रखलें हम सब,
यह धरती और आकाश भी है।

इंसान में इंसानियत है इससे,
हैवानियत भी है जगाता यही।
सात्विकता से इसे भर लें हम,
आध्यात्मिकता भी लाता है यही।

है रिश्तो में एहसास यही,
बेमतलब का बकवास यही।
इससे ही मिलता मोक्ष हमें,
बिगड़े तो सत्यानाश यही।

पूजा भी यह,सजदा भी यह,
गिरजाघर का प्रार्थना भी यह।
गुरुद्वारे का साहेब भी यह,
अंतहीन ज्ञान की खोज भी यह।

यह ही प्रेसी को प्यार करे,
कभी माता बनके दुलार करे।
वीरों में ओज इसी से है,
यह अपनों में मनुहार करे।

यह वफ़ा भी करे और ज़फा भी करे,
बेगैरत को है सफा भी करे।
कुछ भूलों को यह माफ़ करे,
बुरी नीयत को तो दफा है करे।


2-प्रेम

पथ पर जिससे भी प्रेम मिला,
सदा उसका मान बढ़ा देना।
त्रुटि से भी कोई त्रुटि ना हो,
तुम काम सदा ऐसा करना।

जो भी तुमको जाना- समझा,
वह बेटा तुम पर नाज़ करें।
कुछ दिन में तुमको भुला ना दे,
तू सदा ही ऐसा काज करे।

उसके मन के एक कोने में,
छोटा सा घर एक तेरा हो।
जिसमे यादों के फूल खिले,
नित हँसता हुआ सवेरा हो।

तेरी हमदर्द सदा मैं रहूंँ,
दिल- दिमाग में मेरे सदा तू रहे।
सपना बनकर तिरे आंँखों में,
हर प्रेम का क़र्ज़ अदा तू करे।

बन जा अपनों की धड़कन तू,
हर सांँसों में तेरा वास रहे।
खुशियों की डोर लगे ऐसी,
जहांँ वास सदा मधुमास रहे।

दुनिया की काली नज़रों से,
तू अपने को छुपा लेना।
विश्व मंच पर तेरा यश गूँजे,
सत्कर्म तू इतना जुटा लेना।

तू खुशियों की फूल बने,
तेरे अपने भंँवरे सम हों।
आशीष का बकुचा मिले ऐसा,
जिसमें लवलेश भी ना गम हो।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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