दोस्तों आपने यह तो सुना होगा जैसा अन्न वैसा मन किंतु यदि मैं कहूॅं किसी व्यक्ति के प्रति जैसी हमारी सोच ,वैसा ही उसका जीवन तो शायद आपको वि उच्चश्वास नहीं होगा। लेकिन आज मैं आपको एक आदर्श मिश्रित यथार्थ परक एक ऐसी कहानी सुनाने जा रही हूॅं जो हमारी नकारात्मक सोच का परिणाम है।
यदि हम यह कहें कि हमारी सोच ही हमारे जीवन का आईना है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि ,हम जैसी सोच रखते हैं वैसा ही हमारा जीवन होता है। वह सोच चाहे हमारे स्वयं के लिए हो या दूसरों के लिए। (हाॅं मैं यहाॅं पर यह बात जरूर स्पष्ट करना चाहूॅंगी कि शत-प्रतिशत ऐसा नहीं होता है किंतु बहुधा होता है) नकारात्मक सोच हमें प्रत्येक दशा ,स्थिति, स्थान पर नकारात्मकता प्रदान करती है। वहीं पर सकारात्मक सोच हमें सर्वत्र सकारात्मकता प्रदान करती है।
आज मैं नकारात्मक सोच के परिणाम से तबाह हुई एक ज़िंदगी की कहानी आपको सुनाने जा रही हूॅं जिसका शीर्षक है
नकारात्मक सोच एक अभिशाप
कक्षा पाॅंचवीं में पढ़ने वाला मोहन कर्मठ, मेहनती, सहयोगी और शालीन बच्चा था। किंतु,वह पढ़ने में थोड़ा कमज़ोर था। लेकिन वह पूरा प्रयास करता था कि वह अन्य कामों की भाॅंति पढ़ने में भी अव्वल दर्जे का हो जाए। किंतु उसकी मेहनत कुछ खास रंग नहीं ला पाती थी। किंतु वह अनवरत प्रयासरत रहता था । एक दिन मोहन अपने प्राथमिक विद्यालय के मध्यावकाश में घर खाना खाने आया (दरअसल 1994,95 से पूर्व जब मध्यावकाश भोजन की व्यवस्था नहीं थी तब बच्चे घर पर भोजन करने के लिए आया करते थे) भोजन करके विद्यालय जा ही रहा था कि देखा गली में बड़ी भीड़ है। मोहन के मन में भी उत्सुकता जगी कि आखिर यह कैसी भीड़ है? मोहन जब पास जाकर देखा वहाॅं पर एक व्यक्ति था जो अपने आपको ज्योतिषी बता रहा था ,लोग उसे अपना हाथ दिखा रहे थे और वह हाथ देखकर लोगों का भविष्य बता रहा था। मोहन को भी अपने भविष्य के बारे में जानने की इच्छा हुई, और उसने भी अपना हाथ उस पंडित को दिखाया। लेकिन यह क्या! पंडित ने हाथ देखते ही कहा- बेटा तुम्हारे हाथ में तो विद्या की रेखा ही नहीं है। पंडित के मुॅंह से इस तरह की बात सुनकर मोहन बेचैन हो उठा और बोला- ऐसा नहीं हो सकता। पंडित ने कहा- हाॅं बेटा मैं सही कह रहा हूॅं ,तुम्हारे हाथ में विद्या की रेखा है ही नहीं ।तुम लाख प्रयत्न कर लो लेकिन तुम पढ़ नहीं सकते पंडित के मुॅंह से इस तरह की बात सुनकर मोहन बड़ा ही निराश हुआ और वह उस दिन विद्यालय तो गया किंतु पढ़ने के लिए नहीं अपना बस्ता लाने के लिए। और बस्ता लाने के पश्चात उसने कॉपियों- किताबों को तिलांजलि दे दी और लग गया ,गाय ,गोबर ,उपले ,खेती किसानी आदि में।
मोहन के इस प्रकार के दिनचर्या को देखकर आस-पड़ोस के कुछ सज्जन व्यक्ति उसे बहुत समझाने की कोशिश किए। ऐ मोहन!
तू बावरा है क्या? ऐसा नहीं होता है, ये पंडित सदैव सच नहीं बोलते हैं। तुम इस के कहने पर क्यों पढ़ाई छोड़ दिए? लेकिन मोहन को तो बस और बस पंडित ही बात सच लग रही थी और उसने कापियों – किताबों से जीवन भर के लिए रिश्ता तोड़ लिया। समय बीतता गया समय के साथ-साथ मोहन बड़ा होता गया वह बाल्यावस्था से किशोरावस्था, युवावस्था में आ गया ।उसका शादी- ब्याह हुआ ,बच्चे हुए। और आज भी मोहन वही गाय का गौशाला साफ़ करना उसे चारा – भूसा, डालना, खेतों में काम करना ,उपले पाथना, उपले उठाना यही सब कुछ करता है। जबकि उसके साथ के बहुत सारे बच्चे पढ़- लिखकर अच्छे -अच्छे मुकाम पर पहुॅंच गए। आज मोहन को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि काश!काश! उस दिन वह ढोंगी पंडित न आया होता तो वह पौधा वृक्ष बनने के पहले ही न मुरझा गया होता । वह मोहन को इस प्रकार नकारात्मक बात न बताया होता तो मोहन भी आज शिक्षित होता। लेकिन उस पंडित की नकारात्मक वाणी ने उसके जीवन की पूरी दिशा और दशा ही परिवर्तित कर दी ।वह हॅंसता – खेलता मोहन बचपन में ही मुरझा गया ।
मित्रों हमें अपनी सोच को सदैव सकारात्मक रखना चाहिए क्योंकि सकारात्मक सोच हमें सकारात्मक कार्यों की तरफ़ अग्रसर करती है, जिसका रास्ता उत्थान की तरफ़ जाता है और नकारात्मक सोच हमें जीवन में नकारात्मक कार्यों की तरफ़ ले जाती है जिसका मार्ग पतन की तरफ़ ले जाता है।जिस प्रकार नन्हे से मोहन के लिए इस पंडित और आस-पड़ोस के लोगों की नकारात्मक सोच अभिशाप बन गई और उसे पतन तो नहीं कह सकते हैं किंतु उसके जीवन की दिशा व दशा अवश्य परिवर्तित कर दिया। जो मोहन हॅंसने-खिलखिलाने और पढ़ने की कोशिश करता था वह पंडित की बातों को सुनने के पश्चात मानो अवसाद ग्रसित हो गया और उसका बचपन गोबर ,उपलों, खेतों ,अनाज के बोझों में सिमट कर रह गया ।अतः हमें किसी के लिए भी नकारात्मक सोच नहीं रखनी चाहिए । क्योंकि यदि सकारात्मक सोच वरदान का कार्य करती है
तो नकारात्मक सोच अभिशाप का कार्य करती है।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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