भारत के हर बच्चे आओ,
नए युद्ध की करें तैयारी।
अवांछनीयता को दूर भगाएंँ,
विचार अस्त्र से काटें सारी।

अनपेछित क्रिया-कलाप जो,
लोकमानस में घर हैं बनाए।
वांछनीयता को फैलाकर,
राष्ट्र को हम खुशहाल बनाएँ।

परशुराम की करें पुनरावृत्ति,
अराजकता के सर को काटें।
कल्मष विचार जो जन हैं पाले,
निष्कलमष्ता से उसे पाटें।

जन- जन के मन पर गहराया,
दानवी ध्वजा अनाचार का।
समूल नाश हम उसका कर दें,
साम्राज्य बढ़े ना दुराचार का।

बड़े-बड़े युद्ध हमने देखे,
अद्भुत एक युद्ध अब देखेंगे।
भारतीय दर्शन सम्राट अब होगा,
क्षणभंगुर घुटने टेकेंगे।

जगमग भारत का हर कोना होगा,
जिसको हमें सँजोना होगा।
चक्रवर्ती साम्राज्ञी सद्भावना होगी,
अब ना हमको रोना होगा।

युग अवतार तुमहीं हो बच्चे,
व्यक्तित्व तुम्हारा है अकलंकित।
युग निर्माण हेतु करो आंदोलन,
विशुद्ध रूप हो और परिमार्जित।

महान संभावनाएंँ उत्पन्न करो तुम,
उन पर तुम चलकर दिखलाओ।
तभी तो मेरे प्यारे बच्चों,
भारत माँ की शान कहाओ।

सच्चाई का क्षेत्र गहो तुम,
सद्भावना का बो दो बीज।
कर्म सदा उत्कृष्ट करो तुम,
पा लो तुम हर उत्तम चीज़।

तपोनिष्ठ आज तुम्हें है बनना,
बल्लभ, जयप्रकाश मार्ग है गहना।
नव चेतना को जागृत करके,
नव भारत का निर्माण है करना।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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