खुशियों की बहार लेके,
पूरा वादों का संसार लेके
ग्रीष्म में मधुमास लेके,
जीवन में उल्लास लेके।
माॅं की आंँखों का तारा आया रे,
मेरा राज दुलारा आया रे।
मेरे घर का उजियारा आया रे,
कि,आज मेरा प्यारा बेटा आया रे।

उदासी की चादर,
जब जीवन में फैली।
जीवन बन गया ,
विष की थैली।
खुशियों की सौगात लेके,
तम को हर उजास लेके।
पूनम की रात को लेकर आया रे,
अमावस्या को हरने आया रे।
कार्तिक पूर्णिमा का चांँद बनने आया रे,
कि, आज मेरा प्यारा बेटा आया रे।

मेरे दिल का तू शहजादा,
मैं तेरी मैया तू बेटा राजा।
बासी खुशियों में बघार दिया ताजा,
हर्षित घर, घर का दरवाज़ा।
मेरा दुख हरने आया रे,
तू खुशियांँ भरने आया रे।
मेरा डर हरने आया रे ,
कि, आज मेरा प्यारा बेटा आया रे।

मद्धिम बड़ा था जीवनदीप,
घी जम गया अधिकता शीत।
अंगूली पर गिन दिन रहा बीत,
उड़ गया जीवन से हर प्रीत।
खुशी का अध्याय ले आया रे,
जीवन पर्याय ले आया रे।
नीरूपाय जीवन में कई उपाय लाया रे,
कि, आज मेरा प्यारा बेटा आया है।

पतझड़ जीवन में था छाया, मधुमास का रंग ना आया। भादो की किच- किच थी आई,
कीट पतंगों को थी लाई।
सपनों का बन पर्याय आया रे,
एक नया अध्याय आया रे।
तू बन मेरा सहाय आया रे,
कि आज मेरा प्यारा बेटा आया रे।

तेरे संग मेरी खुशियाॅं गई थी,
आने से तेरे बहाली हुई थी।
सपने दिखाकर तू जो गया था ,
पूरे हुए सब जो पुराना नया था।
सारे सपनों को करके साकार आया रे,
सारे रिश्तों का करने ऋंगार आया रे।
मेरे जीवन में भरने प्यार आया रे,
कि, आज मेरा प्यारा बेटा आया रे।

डरी व सहमी सदा ,
रहने लगी थी।
अनायास अश्कों की धारा,
बहने लगी थी।
डर कहीं भागा,
हिम्मत है जागा।
मानो तू बन पहरेदार आया रे,
मेरा बेटा नहीं संसार आया रे,
जीवन के हलाहल को करने परिहार आया रे।
कि, आज मेरा प्यारा बेटा आया रे।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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