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राष्ट्रीय महिला दिवस और सरोजनी नायडू

आओ जानें आज हम सभी,
भारत कोकिला नाम को।
13 फरवरी 1879 में जन्मीं,
नमन स्वतंत्रता सेनानी महान को।

उच्च कोटि की ये वक्ता थीं,
ना अबला यह सशक्ता थीं।
टूटे सपने, शक्ति ,आशा जानो,
इनकी कविता के जान को।
आओ जानें आज हम सभी,
भारत कोकिला नाम को।

जीवन,मृत्यु ,गौरव ,सौंदर्य,
अपनी कविता में बात करें।
सद्भावनाएँ साथ भरी थीं,
सब पर ही आगाज़ करें।
विरले ही जन कोई होंगे,
स्मरण न करें ज्ञान की खान को।
आओ जाने आज हम सभी,
भारत कोकिला नाम को।

इनकी कविता के पद्य गेय थे,
इन्हें गाना बड़ा मनोहारी था।
भारत कोकिला नाम पड़ा था,
पूरा जग बलिहारी था।
अघोरनाथ चट्टोपाध्याय पिता थे,
जानो वरदा सुंदरी माता के नाम को।
आओ जाने आज हम सभी,
भारत कोकिला नाम को।

भ्राता- भगिनीआठ थे इनके,
उनमें वो थीं सबसे बड़ी।
एक भाई वीरेंद्रनाथ थे ,
जो थे सशक्त क्रांतिकारी।
हरिद्रनाथ कथाकार, कलाकार, कवि थे ,
ऊंँचा किए देश की शान को।
आओ जाने आज हम सभी,
भारत कोकिला नाम को।

1947 में उत्तर प्रदेश की ,
ये पहली राज्यपाल हुईं।
इसीलिए उनका जन्म दिवस को,
राष्ट्रीय महिला दिवस नाम दई।
है महिला कमज़ोर नहीं,
पूरा कीं वो इस अरमान को।
आओ जाने आज हम सभी,
भारत कोकिला नाम को।

13 फरवरी 2015 से,
राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हम।
आज भी उनके जन्मदिवस पर,
करें कुछ दिलचस्प बातें हम।
1989 में गईं ब्याहीं
गोविंदराजुल नायडू से ,
ये वो प्रतिभा धनी व्यक्ति थे
जो चाहे भौतिक विज्ञान को।
आओ हम सब याद करें,
भारत कोकिला नाम को।

सामान्य नहीं मेधावी थीं वो,
बारह वर्ष में पास कीं बारह।
लेडी ऑफ द लेक लिखीं जब,
उम्र थी इनकी मात्र बस तेरह।
गोल्डन थ्रेशोल्ड पहली कविता थी,
जानें हम इस पैगाम को।
आओ हम सब याद करें,
भारत कोकिला नाम को।

एक बार की बात सुनो तुम,
गहन समस्या में थीं उलझी।
अथक प्रयास वो करके हारीं,
तब भी नहीं समस्या सुलझी।
लेडी ऑफ़ द लेक कविता सृजन कीं,
लेने हेतु छोटे से विराम को।
आओ हम सब याद करें,
भारत कोकिला नाम को।

वर्ड ऑफ टाइम, ब्रोकन विंग,
कविता की भी रचयिता थीं।
लोगों के यह मन अति भाईं,
काव्य लोक की सविता थीं।
1914 में मिलीं बापू से,
शीश झुकाईं उनके ज्ञान को।
आओ हम सब याद करें,
भारत कोकिला नाम को।

हैदराबाद थी जन्मस्थली,
भारत बना था कर्मस्थली।
कर्तव्य परायणा बाला थीं,
देश का ऊँचा गौरव कर लीं।
आओ शीश झुकाएँ इनको,
इनके जाबाजी काम को।
आओ हम सब याद करें,
भारत कोकिला नाम को।

धार्मिक वातावरण था घर का,
श्री राम के सभी आराधक थे।
जीवन इनका बड़ा सरल था,
ना कोई दुर्व्यसन घातक थे।
बनी शासिका उत्तर प्रदेश की,
जग सराहे इनके हर काम को।
आओ हम सब याद करें,
भारत कोकिला नाम को।


2-
विषय-जीवन

जीवन ईश्वर का दिया ,
है अनमोल उपहार।
इसको सार्थक करने हेतु,
करो उचित व्यवहार।

कब कैसे उपयोग है करना,
यह हम पर है निर्भर।
चाहें तो इसे बना दें नाला,
चाहे तो इसे निर्झर।

गम्य नहीं समझें जीवन को,
इसको समझें प्रस्थान।
गम्य हुआ तो थम जाएगा,
बन जाएगा बंजर स्थान।

कर्म, भ्रमण, सुखऔर दुख का,
यह है एक अद्भुत योग।
इसके राज को समझ लिया जो,
पकड़े ना दुख, व्याधि कोई रोग।

जीवन के तुम अर्थ को समझो,
इसका उद्देश्य तलाशो।
जीव मात्र की प्राथमिकता यह,
जीवन को ना कभी नाशो।

घर-परिवार और रिश्ते-नाते,
मिलके इसे अनोखा बनाते।
अनीति, अत्याचार गहें ना,
हैं हमको ये सदा समझाते।

पाप- पुण्य और ऊँच- नीच का,
यह अद्भुत है मेला।
फूँक- फूँक के कदम को रखो,
लगा है ठेलम ठेला।

एक बार ही मिलता जीवन,
खुशी से इसको जीयो।
खेलो-कूदो, हंँसी-खु़शी से,
गरल कभी ना पीयो।

चार दिनों का है यह जीवन,
हंँसी- ख़ुशी में गुजा़रो।
नहीं किसी से बैर मोल लो,
नहीं किसी को मारो।

किसी की आंँखें ना हों गीली,
दुख में सबके होना साथ।
ख़ुशी से सबको गले लगाना,
रखना एक सुखद जज़्बात।

नेकी करो मिलेगी नेकी,
बदी करो वो ही पाओगे।
अंत काल में भवसागर से,
पार नहीं तुम पाओगे।

सच्ची-सच्ची बात बताऊँ,
गांँठ इसे तुम बाँध लो आज।
बिगड़े के तुम काज बनाना,
गिरेगा ना कभी तुम पर गाज़।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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