आज तेरा अस्तित्व भले कुछ नहीं,
कल बनाने की काबिलियत तुझमें भरी।
बैठना ना कभी तुम थक हार के,
इस असलियत को याद रखना हर घड़ी।

सफलता, असफलता, निराशा, व कुंठा,
जीवन में साथ- साथ चलते सभी।
सकारात्मकता को गहो तुम सदा,
नकारात्मकता को त्याग दो तुम अभी।

हौसला पस्त सदा नकारात्मकता करे,
सकारात्मकता हिम्मत, साहस को धारण करे।
झाँको इतिहास में तो तुम पाओगी,
सफ़ल वो ही हुआ जो ऋणात्मकता से ना डरे।

जीवन में कभी जो ऐसा भी पल आ आए,
ज़िंदगी के दरवाज़े सभी बंद हों जाएँ।
स्व- विवेक से उसको तुम खोल लेना,
फ़िर खुशियाॅं,सफलता तुम्हारे ही पास मडराएँ।

दरवाज़े के उस पार सफलता खड़ी ,
इस पारअसफलता है बिखरी पड़ी।
सचेत, सावधान हो तो सफ़लता मिले,
अचेत होते ही असफलता चरम पर चढ़ी।

आकर घेरे तुम्हें यदि निराशा कभी,
कुंठा भी उसी का साथ देने लगे।
थक- हारकर बैठना ना कभी,
वो नाउम्मीद हो माथा पीटने लगे।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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