कवना ही देशवा से आवे ले बदरिया हो ,
कॅंहवाॅं बारिसने को जाय हो ललनवा।

पूरुब देशवा से आवेले बदरिया हो,
पछिम बरीसने को जाय हो ललनवा।

ओही रे बदरिया में बाबा उदासल,
जियरा का हाल ना बुझाए रे ललनवा।

घर में से निकलेली बेटी हो कवन बेटी,
बाबा के कगरिया भइली ठाढ़ हो ललनवा।

काहें के मोरे बाबा मनवा उदासल,
काहें नाहीं बोल हंस बोल हे ललनवा।

दुनिया जगत सब वर हम खोजलीं,
मनवा के वर नाहीं भावे हो ललनवा।

आंख के पुतरिया के कहां हम बियहीं,
केकरा के संउंप हरसाईं हे ललनवा।

बेटा के बाबा बड़ा ही धन लोभी,
बढ़, चढ़कर धन हमसे माॅंगे हैं ललनवा।

बेटा क जईसन शिक्षित तोहें कइलीं,
धन मोर गइले ओराई हो ललनवा।

एही के लागी चिंतित हम बानी ,
कैसे कइसे करीं तोहार बियाह है ललनवा।

आंखि के पुतरिया तोहार हम बाबा हो,
अबला ही नारी जिन बनाव हो ललनवा।

धनवा भी दे देब जनवा दे देब,
खुशिया तबहुॅं नहीं पाईब हे ललनवा।

कवनो धन लोभिया से जीन हमें व्यहीह,
भले हमें रखिह कुॅंवार हे ललनवा।

राउर बेटा हम बनी के देखाईब,
धन लोभी जइहं लजाई हो ललनवा।

बेटी के हाथ बाबा सुवर हाथे दीह,
बिकाऊ वर हाथे जन दीह हे ललनवा।

बेटी के बात सुनि बिहॅंसी बाबा उठलें,
हियवा से लिहलें लगाई हे ललनवा।

अंखिया क परदा बेटी हो खोली दिहलू ,
अब नाहीं जाईब भुलाई हो ललनवा।

तोहरे ही जोगे जब ले वर नाहीं मिलिहं,
ना ही हम करब कन्यादान हो ललनवा।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *