कवना ही देशवा से आवेला दुलहवा हो,
केकरा के लूटी लेई जाला हे लाला ।

पूरुब देशवा से आवेला दुलहवा हो,
बचिया के लूटी लेई जाला हे लाला।

काहे ना मोरे बाबा रोकेल दुलहवा हो,
काहे हमारा लूटि लेई जाला हे लाला।

आंस पोछी बोलेलॅं बेटी के बाबा हो ,
जगवा क रीतिया ना
बदलाला हे लाला।

अईसन रीतिया बदल मोरे बाबा हो,
नाहीं बेटी होई पराया हो लाला।

जेही रे कोखिया से बेटा
जन्म लेला,
ताही कोखी बेटी जन्माला हे लाला।

फिर काहे मोरे बाबा बेटा तोहार हउवे,
काहे बेटी होली पराया हे लाला।

कुलावा क बढ़ती बेटा से होला,
एही से बेटा आपन कहाला हे लाला।

एही रीतिया के जनक ना बदललें,
जानकी जी के कईलं
पराया हे लाला।

जनमत बेटी पराया धन होली,
पराया धन ना ही रखाला हे लाला।

गइया जे भइसिया बाबा आपन होले,
काहे बेटी होली पराया हे लाला।

लक्ष्मी कहाली मोरी गईया जे भइसिया,
जनमत बेटी पराया हे लाला।

साधना शाही, वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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